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Bihar

पटना में 'भारत रत्न' का बिगुल, नीतीश कुमार के सम्मान की मांग ने बढ़ाई सियासी हलचल! पोस्टर ने छेड़ी नई बहस, कार्यकर्ताओं ने की 'सेवक' की पुकार

बिहार की राजधानी पटना में सियासत गरमा गई है! 'सुशासन बाबू' के नाम से मशहूर पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान राज्यसभा सांसद नीतीश कुमार को देश का सर्वोच्च…

पटना में 'भारत रत्न' का बिगुल, नीतीश कुमार के सम्मान की मांग ने बढ़ाई सियासी हलचल!  पोस्टर ने छेड़ी नई बहस, कार्यकर्ताओं ने की 'सेवक' की पुकार

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बिहार की राजधानी पटना में सियासत गरमा गई है! 'सुशासन बाबू' के नाम से मशहूर पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान राज्यसभा सांसद नीतीश कुमार को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' देने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ रही है। इस बार यह मांग जनता दल (यूनाइटेड) के कार्यालय के बाहर बड़े-बड़े पोस्टर लगाकर की गई है, जिसमें साफ लिखा है— "नीतीश सेवक मांग रहा है... अब 'भारत रत्न सम्मान'"। यह कदम नीतीश कुमार के राजनीतिक जीवन के दो दशक पूरे होने के संदर्भ में काफी अहम माना जा रहा है।

Reference · X (formerly Twitter)

Sadan Singh Rajput (@SadanJee) on X

नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग, पटना में लगे पोस्टर से सियासी हलचल तेज! 20 साल के कार्यकाल को जनसेवा की मिसाल बताते हुए सम्मान की मांग उठाई गई। पोस्टर में लिखा गया नीतीश सेवक मांग रहा है, अब भारत रत्न सम्मान इस पोस्टर को जदयू कार्यकर्ता के तरफ से जेडीयू दफ्तर के बाहर लगाया गया है।

https://x.com/i/status/2073280902151680323

20 साल का कार्यकाल: 'जनसेवा की स्वर्णिम मिसाल' पोस्टर के जरिए नीतीश कुमार के 20 साल के शासनकाल को "जनसेवा की स्वर्णिम मिसाल" बताया गया है। इसमें दावा किया गया है कि उन्होंने बिहार को एकता, न्याय और समावेशी विकास के रास्ते पर आगे बढ़ाया है और विकास, कानून-व्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों में उल्लेखनीय बदलाव किए हैं। बता दें कि नीतीश कुमार ने साल 2000 में सिर्फ सात दिन के लिए सीएम पद संभाला था, लेकिन 2005 में भारी बहुमत हासिल करने के बाद उन्होंने बिहार की बागडोर अपने हाथों में ले ली। उन्होंने 'अति पिछड़ा' और 'महादलित' जैसे वर्गों के लिए आरक्षण की व्यवस्था करके सामाजिक समीकरण साधे और महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए शराबबंदी जैसे कठोर कदम उठाए, जो उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक विरासत मानी जाती है। निशांत कुमार को 'फ्यूचर लीडर' का तमगा, विरासत की ताजा बहस इन पोस्टरों ने सिर्फ नीतीश कुमार के सम्मान की मांग ही नहीं की, बल्कि उनके बेटे और स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार को लेकर भी नया सियासी संदेश दिया है। पोस्टर में निशांत कुमार को 'फ्यूचर लीडर ऑफ बिहार' बताया गया है और नारे लिखे हैं— "तीर निशान... तकदीर निशांत" और "नीतीश जी का मिशन अधूरा... निशांत कुमार ही करेंगे पूरा..."। इससे साफ संकेत मिलता है कि नीतीश कुमार के करीबी उनके बेटे को राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में देखना चाहते हैं। पोस्टर के पीछे कौन और क्या है राजनीतिक अर्थ? यह पोस्टर जदयू कार्यकर्ताओं की ओर से पार्टी दफ्तर के बाहर लगाया गया है। हालांकि, पार्टी की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन यह पहली बार नहीं है जब ऐसी मांग उठी हो। इससे पहले जदयू नेता के.सी. त्यागी और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह भी इसकी वकालत कर चुके हैं। हालांकि, जदयू ने पहले इसे नेता का 'निजी विचार' बताकर दूरी बना ली थी। ऐसे में अब कार्यकर्ताओं का यह खुला समर्थन 'भारत रत्न' की राजनीतिक मुहिम की तरह दिख रहा है, जो शायद नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत को सहेजने की एक कोशिश है। इसमें 'मिशन विकसित बिहार-2040' का जिक्र भी भविष्य के एजेंडे की तरफ इशारा करता है।

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