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Saharsa news : मांग बढ़ी तो खेतों में लहलहाने लगी मड़ुआ की फसल

Published: 16/9/2024, 11:23:04 am33 viewsSeemanchal Live

Saharsa news : मांग बढ़ी तो खेतों में लहलहाने लगी मड़ुआ की फसल Saharsa news : मड़ुआ स्वास्थ्यवर्धक है और कम लागत के अलावा मौसम के प्रतिकूल असर वाले फसलों में शुमार है. Saharsa news : भोजन, संस्कृति और परंपराओं के रूप में प्राचीन प्रथाओं के मूल्यों को पहचानने में भारत हमेशा अग्रणी रहा है. पर, इसे आधु

Saharsa news : मांग बढ़ी तो खेतों में लहलहाने लगी मड़ुआ की फसल
Saharsa news : मांग बढ़ी तो खेतों में लहलहाने लगी मड़ुआ की फसल Saharsa news : मड़ुआ स्वास्थ्यवर्धक है और कम लागत के अलावा मौसम के प्रतिकूल असर वाले फसलों में शुमार है. Saharsa news : भोजन, संस्कृति और परंपराओं के रूप में प्राचीन प्रथाओं के मूल्यों को पहचानने में भारत हमेशा अग्रणी रहा है. पर, इसे आधुनिकता कहें या कुछ और बीच के कुछ वर्षों में मोटे अनाज को हेय दृष्टि से देखा जाने लगा था. आज वही मोटा अनाज लोगों के स्वास्थ्य के लिए संजीवनी साबित होने लगा है. मोटा अनाज प्रोटीन, फाइबर और आयरन, कैल्शियम जैसे खनिजों का एक समृद्ध स्रोत है. इसलिए अब लोगों को लगने लगा है कि स्वस्थ रहना है, तो हमें मोटे अनाज को भोजन में शामिल करना ही होगा.   सरकार भी मोटे अनाज के उत्पादन को लेकर बड़े स्तर पर जागरूकता अभियान चला रही है, तो लोग भी अब इसके प्रति जागरूक हो रहे हैं और इसकी खेती भी शुरू हो गयी है. कृषि विभाग की ओर से मोटा अनाज उपजाने के लिए लगातार किसानों को जागरूक करने के अभियान का अब सकारात्मक परिणाम दिखने लगा है. जहां लोगों की इसमें रुचि बढ़ी है, वहीं किसान भी अब मोटे अनाज की खेती करने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं. इसके लिए कृषि विभाग किसानों को बीज उपलब्ध करा रहा है. दूर-दूर से लोग आते हैं मड़ुआ खरीदने जिले के कई किसान अब मड़ुआ की खेती कर रहे हैं. जिले के विभिन्न इलाकों के खेतों में मड़ुआ की फसल अब लहलहा रही है. सहरसा जिले के बैजनाथपुर स्थित पटेल चौक निवासी किसान शंभु यादव लगभग तीन बीघा में मड़ुआ की खेती कर रहे हैं. बीज कृषि विभाग ने उपलब्ध कराया था. वह लगभग तीन वर्षों से मड़ुआ की ही खेती करते आ रहे हैं. वह बताते हैं कि दूर-दूर से लोग मड़ुआ खरीदने के लिए आते हैं. इससे उन्हें अच्छा फायदा भी हो जाता है एवं मवेशियों के लिए अच्छा चारा भी उपलब्ध हो जाता है. उन्होंने कहा कि हाइब्रिड के जमाने में इसकी खेती विलुप्त होती चली जा रही थी. यह सब देख लगा की मड़ुआ की खेती की जाये और लोगों की सेहत का ख्याल रखा जाये. इसी उद्देश्य से उन्होंने इसकी खेती की शुरुआत की. आज लगभग तीन बीघा में मड़ुआ की खेती कर रहे हैं.  

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