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Supaul News: कोसी नदी के बीच बसे 100 परिवार पांच साल से अंधेरे में, बिजली के लिए आज भी इंतजार

सुपौल के किशनपुर प्रखंड की मौजहा पंचायत का मामला; नदी से घिरे वार्ड नंबर 9 के परिवारों तक नहीं पहुंची बिजली, बच्चों की पढ़ाई से लेकर मोबाइल चार्ज करने तक…

Supaul News: कोसी नदी के बीच बसे 100 परिवार पांच साल से अंधेरे में, बिजली के लिए आज भी इंतजार

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सुपौल के किशनपुर प्रखंड की मौजहा पंचायत का मामला; नदी से घिरे वार्ड नंबर 9 के परिवारों तक नहीं पहुंची बिजली, बच्चों की पढ़ाई से लेकर मोबाइल चार्ज करने तक परेशानी सुपौल, 25 अगस्त 2026: बिहार में बिजली पहुंचाने के लिए बड़े स्तर पर विद्युतीकरण के दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन कोसी क्षेत्र के दुर्गम इलाकों की तस्वीर अब भी अलग है। सुपौल जिले के किशनपुर प्रखंड की मौजहा पंचायत के वार्ड नंबर 9 में कोसी नदी के बीच बसे करीब 100 परिवार पिछले पांच वर्षों से बिजली का इंतजार कर रहे हैं। स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक गांव तक बिजली नहीं पहुंचने के कारण लोगों को रोजमर्रा के कई कामों में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कोसी के बीच बसी आबादी की मुश्किल मौजहा पंचायत का यह इलाका कोसी नदी के प्रभाव वाले क्षेत्र में आता है। यहां रहने वाले परिवारों के लिए सामान्य बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना मैदानी इलाकों की तुलना में ज्यादा चुनौतीपूर्ण है। नदी की धाराओं, कटाव, बाढ़ और आवागमन की मुश्किलों के कारण सड़क, बिजली और दूसरी infrastructure projects को लागू करना आसान नहीं होता। लेकिन स्थानीय परिवारों का सवाल है कि दुर्गम क्षेत्र में रहना क्या उन्हें बिजली जैसी बुनियादी सुविधा से वर्षों तक वंचित रखने का कारण बन सकता है? 25 अगस्त की स्थानीय रिपोर्ट में इस इलाके के करीब 100 परिवारों के पांच वर्षों से अंधेरे में रहने की समस्या प्रमुखता से सामने आई है। बच्चों की पढ़ाई सबसे ज्यादा प्रभावित बिजली नहीं होने का सीधा असर विद्यार्थियों पर पड़ता है। आज शिक्षा तेजी से digital हो रही है। Online classes, educational applications, YouTube lectures और competitive examinations की तैयारी के लिए smartphone तथा internet का इस्तेमाल सामान्य हो चुका है। लेकिन जिस घर में बिजली ही उपलब्ध न हो, वहां digital education का लाभ उठाना मुश्किल हो जाता है। शाम होने के बाद बच्चों को रोशनी के वैकल्पिक साधनों पर निर्भर रहना पड़ता है। इससे पढ़ाई के घंटे सीमित हो सकते हैं और ग्रामीण विद्यार्थियों तथा बिजली वाले क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों के बीच digital divide और बढ़ सकता है। मोबाइल चार्ज करना भी चुनौती आज mobile phone केवल बातचीत का माध्यम नहीं है। Banking, सरकारी योजनाओं की जानकारी, Aadhaar-related services, UPI transactions, मौसम की चेतावनी और emergency communication तक smartphone से जुड़े हैं। कोसी जैसे बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में mobile connectivity और भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि अचानक जलस्तर बढ़ने या किसी medical emergency में फोन बाहरी दुनिया से संपर्क का प्रमुख साधन हो सकता है। बिजली नहीं होने पर mobile charging तक के लिए दूसरे स्थान पर निर्भर रहना पड़ सकता है। बाढ़ के समय समस्या हो जाती है गंभीर कोसी को बिहार की सबसे चुनौतीपूर्ण नदियों में गिना जाता है। मानसून के दौरान नदी के जलस्तर और धाराओं में तेजी से बदलाव हो सकता है। ऐसे समय बिजली और communication infrastructure केवल सुविधा नहीं बल्कि disaster management का हिस्सा बन जाते हैं। अगर किसी गांव में बिजली उपलब्ध हो तो rechargeable lights, mobile phones और दूसरे communication devices को सक्रिय रखना आसान होता है। बिजली के अभाव में रात के समय बाढ़ जैसी emergency situation और कठिन हो सकती है। Solar Power बन सकता है विकल्प ऐसे दुर्गम नदी क्षेत्रों में conventional electricity infrastructure तैयार करने में तकनीकी समस्या हो तो solar-based micro-grid या standalone solar systems विकल्प बन सकते हैं। यह समाधान विशेष रूप से उन बस्तियों में उपयोगी हो सकता है जहां बार-बार नदी की धारा बदलने या बाढ़ के कारण poles और transmission lines को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। हालांकि मौजहा पंचायत के लिए किसी specific solar project की घोषणा की पुष्टि उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं है। इसलिए इसे मौजूदा योजना के बजाय संभावित समाधान के रूप में देखा जाना चाहिए। सरकार और बिजली विभाग तकनीकी survey के बाद तय कर सकते हैं कि conventional grid extension बेहतर होगा या decentralized renewable-energy system। बिजली से रोजगार भी जुड़ा है ग्रामीण विद्युतीकरण का महत्व केवल घर में bulb जलने तक सीमित नहीं है। बिजली उपलब्ध होने के बाद छोटे दुकानदार refrigerator, photocopy machine, computer और दूसरे उपकरण चला सकते हैं। युवा online applications भर सकते हैं, digital services उपलब्ध करा सकते हैं और छोटे व्यवसाय शुरू कर सकते हैं। खेती में भी बिजली का उपयोग सिंचाई और processing से जुड़े उपकरणों में किया जा सकता है। इसलिए किसी गांव का वर्षों तक electricity access से बाहर रहना उसके आर्थिक विकास को भी प्रभावित कर सकता है। कोसी क्षेत्र के लिए अलग Infrastructure Model की जरूरत कोसी का भूगोल सामान्य नहीं है। यहां नदी की बदलती धाराएं, कटाव और हर साल आने वाली बाढ़ infrastructure planning को मुश्किल बनाती हैं। इसलिए संभव है कि conventional तरीके से लगाए गए electric poles कुछ क्षेत्रों में लंबे समय तक सुरक्षित न रह सकें। ऐसे क्षेत्रों के लिए resilient infrastructure की जरूरत होती है—ऐसी तकनीक जो flood-prone geography को ध्यान में रखकर तैयार की गई हो। इसके लिए energy department, disaster-management authorities और district administration के बीच coordinated planning महत्वपूर्ण हो सकती है। करीब 100 परिवारों का सवाल किसी बड़े शहर के संदर्भ में 100 परिवारों की संख्या छोटी दिखाई दे सकती है, लेकिन यहां प्रत्येक परिवार के पीछे बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं और कामकाजी लोग हैं। अगर औसतन एक परिवार में पांच सदस्य भी मानें तो समस्या सैकड़ों लोगों के दैनिक जीवन को प्रभावित कर सकती है। हालांकि वास्तविक आबादी का प्रमाणित आंकड़ा उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं दिया गया है, इसलिए परिवारों की संख्या के आधार पर population का निश्चित दावा करना उचित नहीं होगा। सुपौल में आज कई और स्थानीय मुद्दे 25 अगस्त की सुपौल की स्थानीय खबरों में स्वास्थ्य, कृषि और कानून-व्यवस्था से जुड़े कई मुद्दे भी सामने आए हैं। जिले में एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम शुरू होने की खबर है। वहीं खाद विक्रेताओं को दुकानों पर stock register और rate list प्रदर्शित करने तथा कृषि ऐप के माध्यम से निगरानी की व्यवस्था की जानकारी भी सामने आई है। डहरिया में पुलिस कार्रवाई के दौरान 47 बोतल विदेशी शराब बरामद होने की खबर भी स्थानीय समाचारों में शामिल है। इन सबके बीच कोसी नदी के बीच बसे परिवारों की बिजली की समस्या infrastructure और basic services से जुड़ी महत्वपूर्ण कहानी है। पांच साल का इंतजार कब खत्म होगा? मौजहा पंचायत के वार्ड नंबर 9 की समस्या प्रशासन के सामने एक सीधा सवाल रखती है—अगर conventional grid से बिजली पहुंचाना मुश्किल है तो क्या alternative technology के जरिए इन परिवारों तक reliable electricity पहुंचाई जा सकती है? भारत में renewable energy और decentralized solar systems का विस्तार हुआ है। ऐसे में geographically isolated settlements के लिए अलग model तैयार करना संभव हो सकता है। लेकिन किसी भी समाधान से पहले ground survey, population assessment, flood pattern और technical feasibility की जांच जरूरी होगी। फिलहाल उपलब्ध स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार किशनपुर प्रखंड की मौजहा पंचायत में कोसी नदी के बीच बसे करीब 100 परिवार पांच वर्षों से बिजली की सुविधा से वंचित हैं। यह कहानी केवल बिजली की नहीं है। यह शिक्षा, digital connectivity, रोजगार, सुरक्षा और कोसी क्षेत्र के विकास से जुड़ा सवाल है

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