भारत अब भी अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय छात्रों का सबसे बड़ा स्रोत; लेकिन UG स्तर पर नए आवेदन और रुचि में गिरावट, बढ़ती लागत और बदलते माहौल के बीच उच्च शिक्षा पर नई बहस
नई दिल्ली, 25 अगस्त 2026: अमेरिका में उच्च शिक्षा हासिल करने की योजना बना रहे भारतीय विद्यार्थियों को लेकर एक महत्वपूर्ण बदलाव सामने आया है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में undergraduate courses के लिए भारतीय छात्रों की रुचि में करीब 15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। यह बदलाव ऐसे समय सामने आया है जब भारत अमेरिका के लिए international students का सबसे बड़ा स्रोत बना हुआ है।
अमेरिका लंबे समय से भारतीय विद्यार्थियों के लिए engineering, computer science, business और research जैसे क्षेत्रों में पसंदीदा destinations में शामिल रहा है। इसलिए undergraduate level पर दिखाई दे रही यह गिरावट international education market के लिए महत्वपूर्ण संकेत मानी जा सकती है।
3.63 लाख से ज्यादा भारतीय छात्र अमेरिका में
भारत की मौजूदगी अमेरिकी higher-education system में अब भी बहुत बड़ी है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2024-25 academic year में 3.63 लाख से अधिक भारतीय विद्यार्थी अमेरिका में अलग-अलग courses में enrolled थे। भारत international students के मामले में अमेरिका का सबसे बड़ा source country है।
इसलिए 15 प्रतिशत की गिरावट का अर्थ यह नहीं है कि भारतीय छात्रों ने अमेरिका जाना बंद कर दिया है। बल्कि नई रिपोर्ट विशेष रूप से undergraduate courses में बदलती रुचि की ओर संकेत करती है।
यह अंतर समझना जरूरी है क्योंकि अमेरिका जाने वाले भारतीय विद्यार्थियों का बड़ा हिस्सा postgraduate और advanced degree programmes में भी जाता है।
Undergraduate पढ़ाई क्यों है महंगी?
अमेरिका में bachelor's degree आमतौर पर चार वर्ष की होती है।
International students के लिए tuition fees के अलावा accommodation, food, health insurance, transportation और दूसरी living expenses भी जोड़नी पड़ती हैं।
इस वजह से चार साल की पूरी undergraduate education का कुल खर्च भारतीय परिवारों के लिए काफी बड़ा हो सकता है।
अगर इसी छात्र को भारत में bachelor's degree पूरी करने के बाद केवल master's programme के लिए विदेश जाना हो, तो कुल international-education expenditure comparatively कम किया जा सकता है।
यही आर्थिक गणित कई परिवारों के निर्णय को प्रभावित कर सकता है।
Visa और Immigration माहौल भी महत्वपूर्ण
विदेश में पढ़ाई का निर्णय केवल university ranking देखकर नहीं लिया जाता।
Students और parents visa rules, post-study employment opportunities, immigration policies और long-term career prospects भी देखते हैं।
अगर किसी destination में इन policies को लेकर uncertainty बढ़ती है तो विद्यार्थी दूसरे देशों के विकल्प तलाश सकते हैं।
हालांकि उपलब्ध रिपोर्ट में 15 प्रतिशत गिरावट के पीछे किसी एक कारण को निर्णायक रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है। इसलिए इसे केवल visa policy या केवल fees का परिणाम मानना उचित नहीं होगा।
Canada, UK, Australia और Europe भी विकल्प
आज भारतीय students के सामने अमेरिका के अलावा कई international destinations उपलब्ध हैं।
UK, Australia, Canada और European countries की universities भी भारतीय विद्यार्थियों को आकर्षित करती रही हैं।
इसके अलावा Germany और दूसरे European destinations में कुछ programmes comparatively affordable हो सकते हैं।
हर देश में tuition, visa, work rights और language requirements अलग-अलग होती हैं। इसलिए अब students एक destination पर निर्भर रहने के बजाय कई देशों की तुलना करते हैं।
भारतीय Universities भी बन रहीं विकल्प
भारत में भी higher education ecosystem तेजी से बदल रहा है।
IITs, NITs, central universities और private universities के अलावा कई नए interdisciplinary programmes शुरू हुए हैं।
अगर किसी विद्यार्थी को undergraduate level पर भारत में अच्छी education मिल जाती है तो वह bachelor's degree के बाद master's, research या employment के लिए विदेश जाने का निर्णय ले सकता है।
इस model में परिवार undergraduate education पर होने वाला बड़ा foreign-currency expenditure बचा सकता है।
बिहार और सीमांचल के छात्रों के लिए क्या मायने?
बिहार के पूर्णिया, कटिहार, अररिया और किशनगंज जैसे जिलों में भी पिछले कुछ वर्षों में students के बीच engineering, medical और foreign education को लेकर awareness बढ़ी है।
लेकिन विदेश में undergraduate education का खर्च middle-class families के लिए बड़ी चुनौती हो सकता है।
ऐसे विद्यार्थियों के लिए scholarship बेहद महत्वपूर्ण होती है।
सिर्फ university admission मिलना पर्याप्त नहीं है। छात्र को tuition fees, accommodation, health insurance और रोजमर्रा के खर्च का realistic calculation पहले करना चाहिए।
Scholarship की पूरी जानकारी जरूरी
विदेश में पढ़ाई की योजना बनाने वाले students को university की advertised tuition fee देखकर ही निर्णय नहीं लेना चाहिए।
उन्हें यह देखना चाहिए कि scholarship चारों वर्षों के लिए है या केवल पहले वर्ष के लिए, scholarship बनाए रखने के लिए minimum academic performance क्या चाहिए और hostel तथा insurance जैसे खर्च उसमें शामिल हैं या नहीं।
कई बार अच्छी scholarship मिलने के बाद comparatively expensive university भी affordable हो सकती है।
इसलिए final decision university की total cost of attendance देखकर करना बेहतर है।
Education Loan लेने से पहले Career Calculation
विदेशी degree के लिए बड़ा education loan लेना भी भारतीय families में सामान्य होता जा रहा है।
लेकिन loan लेते समय केवल admission को लक्ष्य बनाना जोखिमपूर्ण हो सकता है।
Course पूरा होने के बाद expected salary, employment opportunities, loan repayment period और currency fluctuation को भी ध्यान में रखना चाहिए।
अगर undergraduate degree के लिए बहुत बड़ा loan लिया गया और graduation के बाद नौकरी मिलने में देरी हुई तो financial pressure बढ़ सकता है।
STEM Courses की लोकप्रियता बरकरार
भारतीय विद्यार्थियों के बीच Science, Technology, Engineering and Mathematics यानी STEM programmes लंबे समय से लोकप्रिय रहे हैं।
Artificial Intelligence, Data Science, Computer Science, Robotics, Cybersecurity और semiconductor technology जैसे क्षेत्रों ने international education की मांग को नया आयाम दिया है।
आने वाले वर्षों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि undergraduate applications में गिरावट STEM programmes में भी दिखाई देती है या मुख्य रूप से दूसरे disciplines तक सीमित रहती है।
अमेरिका के लिए भी महत्वपूर्ण भारतीय विद्यार्थी
भारतीय students केवल universities के लिए tuition revenue का स्रोत नहीं हैं।
वे research labs, technology ecosystem और skilled workforce pipeline का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बनते हैं।
यही कारण है कि international student enrollment में बड़े बदलाव पर American universities भी नजर रखती हैं।
अगर undergraduate level पर भारतीय विद्यार्थियों की रुचि लगातार कम होती है तो universities को scholarships, recruitment और international outreach strategies पर दोबारा विचार करना पड़ सकता है।
अभी अमेरिका की लोकप्रियता खत्म नहीं
15 प्रतिशत की गिरावट को अमेरिका से भारतीय छात्रों के मोहभंग के रूप में प्रस्तुत करना जल्दबाजी होगी।
सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि भारत अभी भी अमेरिका में international students का सबसे बड़ा source है और 2024-25 में 3.63 लाख से अधिक भारतीय विद्यार्थी वहां पढ़ रहे थे।
लेकिन undergraduate courses में सामने आया 15 प्रतिशत decline एक ऐसा संकेत जरूर है जिस पर universities, education consultants और भारतीय families सभी की नजर रहेगी।
अगर यह trend आगे भी जारी रहता है तो भारतीय students की foreign-education strategy में बड़ा बदलाव दिखाई दे सकता है—भारत में graduation और विदेश में specialization या postgraduate education का रास्ता और लोकप्रिय हो सकता है।
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