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अंतरिक्ष और उपग्रह प्रणाली विज्ञान सस्टेनेबिलिटी अध्ययन में दे सकते हैं अत्यधिक योगदान

हमारे पर्यावरण की हालत पर काफी चर्चाएं हो रही हैं और खास तौर पर पेरिस समझौते के बाद संवहनीय विकास (सस्टेपनेबल डेवलपमेंट) वैश्विक एजेंडे में सबसे ऊपर हो गया है। सस्टे नेबिलिटी अध्ययन की समकालीनता और अत्यंत महत्वपूर्ण प्रकृति अपने दायरे में ऊर्जा व पर्यावरण, प्राकृतिक संसाधन, जल अध्ययन, जैव प्रौद्योगि

अंतरिक्ष और उपग्रह प्रणाली विज्ञान सस्टेनेबिलिटी अध्ययन में दे सकते हैं अत्यधिक योगदान
हमारे पर्यावरण की हालत पर काफी चर्चाएं हो रही हैं और खास तौर पर पेरिस समझौते के बाद संवहनीय विकास (सस्टेपनेबल डेवलपमेंट) वैश्विक एजेंडे में सबसे ऊपर हो गया है। सस्टे नेबिलिटी अध्ययन की समकालीनता और अत्यंत महत्वपूर्ण प्रकृति अपने दायरे में ऊर्जा व पर्यावरण, प्राकृतिक संसाधन, जल अध्ययन, जैव प्रौद्योगिकी के साथ-साथ जलवायु विज्ञान को भी शामिल करती है। यह अध्ययन एक तरफ बहु-विषयक और अंतःविषयक पद्धतियों को अपनाता है और दूसरी तरफ, यह सामाजिक विज्ञान, अर्थशास्त्र, पॉलिसी, कानूनी ढांचे और प्रबंधन के संबद्ध तत्वों को लेकर भी काम करता है। इन मुद्दों की एक व्यापक समझ इन्हें लेकर ठोस काम करने के लिए रणनीतियों के विकास की सही दिशा निर्धारित करने में मदद करती है, जिससे एक आम नागरिक के जीवन की गुणवत्ता में सुधार और एक संतुलित समाज के निर्माण का मार्ग प्रशस्त होता है। उपरोक्त के मद्देनजर और इसके वक्त की दरकार होने के चलते टेरी स्कूल ऑफ एडवांस्ड स्टडीज संवहनीय विकास लक्ष्यों (सस्टेरनेबल डेवलपमेंट गोल्स- SDG 2030) की प्राप्ति के लिए प्रतिबद्ध है, जिसके लिए सभी हितधारक समूहों के ठोस प्रयासों और सक्रिय भागीदारी की आवश्यकता है। टेरी स्कूल ऑफ एडवांस्ड स्टडीज (TERI SAS) एक अग्रणी संस्थान है जो अपनी स्थापना के समय से ही इस उद्देश्य से संलग्न है। शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में उत्कृष्टता के लिए अपने निरंतर प्रयास के तहत TERI SAS जाने-माने वैज्ञानिक, पद्मविभूषण डॉ. के. कस्तूरीरंगन, पूर्व अध्यक्ष, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन और प्रोफेसर एमेरिटस, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज, बेंगलुरु द्वारा एक व्याख्यान का आयोजन कर रहा है। इस व्याख्यान का विषय है- 'सस्टे नेबिलिटी अध्ययन में अंतरिक्ष और उपग्रह प्रणालियों का योगदान'।   सस्टे नेबिलिटी अध्ययन में अंतरिक्ष स्थित धरती की निगरानी करने वाली वर्तमान उपग्रह प्रणालियों द्वारा उत्पन्न किए जा सकने वाले पर्याप्त इनपुट्स मिल सकते हैं। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के तहत भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम ने पिछले 50 वर्षों में धरती की निगरानी और संचार उपग्रह प्रणालियों का एक समूह स्थापित किया है। ये उपग्रह मौसम और जलवायु विज्ञान प्रणालियों से संबंधित आंकड़ों के अलावा, नवीकरणीय और गैर-नवीकरणीय, धरती के दोनों प्रकार के संसाधनों के बारे में समय पर, स्पष्ट और सटीक जानकारियां उपलब्ध करा सकते हैं। श्री कस्तूरीरंगन इस क्षेत्र में ISRO के प्रयासों और योगदान के बारे में विस्तार से बताएंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार उनका व्याख्यान 14 नवंबर 2019 को TERI कैंपस, 10, वसंत कुंज इंस्टीट्यूशनल एरिया में शाम 5 बजे से किया जाएगा।   source PTI

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