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ऐसे हैं हमारे कोरोना योद्धा: मरीजों की खातिर 14 घंटे काम और रोजाना 90 किलोमीटर का सफर

Published: 14/04/2020, 01:23:23 pm3,237 viewsSeemanchal Live

ऐसे हैं हमारे कोरोना योद्धा: मरीजों की खातिर 14 घंटे काम और रोजाना 90 किलोमीटर का सफर दिल्ली में कोरोना का संक्रमण रोकने के लिए सरकार तमाम प्रयास कर रही है। मरीजों के साथ-साथ उपचार कर रहे पारामेडिकल स्टाफ और डॉक्टरों का भी पूरा ध्यान रख रही है। लेकिन शुरुआती दौर में डॉक्टरों और पारामेडिकल स्टाफ को इ

ऐसे हैं हमारे कोरोना योद्धा: मरीजों की खातिर 14 घंटे काम और रोजाना 90 किलोमीटर का सफर
ऐसे हैं हमारे कोरोना योद्धा: मरीजों की खातिर 14 घंटे काम और रोजाना 90 किलोमीटर का सफर दिल्ली में कोरोना का संक्रमण रोकने के लिए सरकार तमाम प्रयास कर रही है। मरीजों के साथ-साथ उपचार कर रहे पारामेडिकल स्टाफ और डॉक्टरों का भी पूरा ध्यान रख रही है। लेकिन शुरुआती दौर में डॉक्टरों और पारामेडिकल स्टाफ को इतनी सुविधाएं उपलब्ध नहीं थी। बावजूद इसके किसी ने हिम्मत नहीं हारी और मरीजों की सेवा में लगे रहे। डॉ माधव भी उन्हीं कोरोना योद्धाओं में से हैं, जो संकट की इस घड़ी में डट कर खड़े हैं और अपना कर्तव्य इमानदारी से निभा रहे हैं। 14 घंटे लगातार काम और घर में आइसोलेशन: डॉक्टर माधव ने बताया कि वह द्वारका में रहते हैं। 13 मार्च को आदेश आया और कोविड-19 के उपचार के लिए डॉक्टरों व पारामेडिकल स्टाफ की पहली बेंच तैयार हुई। टीम को राजीव गांधी अस्पताल में तैनात किया गया। उन्हें अस्पताल आने और जाने के लिए रोज 90 किलोमीटर का सफर करना पड़ता था। 14 घंटे की ड्यूटी के बाद वह गाड़ी चलाकर घर जाते थे। घर में खुद को परिवार से दूर एक कमरे में बंद कर लेते थे। काम के लंबे घंटे और लंबा सफर करने के कारण उनकी तबीयत खराब हो गई। दिल्ली में कोरोना का संक्रमण रोकने के लिए सरकार तमाम प्रयास कर रही है। मरीजों के साथ-साथ उपचार कर रहे पारामेडिकल स्टाफ और डॉक्टरों का भी पूरा ध्यान रख रही है। लेकिन शुरुआती दौर में डॉक्टरों और पारामेडिकल स्टाफ को इतनी सुविधाएं उपलब्ध नहीं थी। बावजूद इसके किसी ने हिम्मत नहीं हारी और मरीजों की सेवा में लगे रहे। डॉ माधव भी उन्हीं कोरोना योद्धाओं में से हैं, जो संकट की इस घड़ी में डट कर खड़े हैं और अपना कर्तव्य इमानदारी से निभा रहे हैं। 14 घंटे लगातार काम और घर में आइसोलेशन: डॉक्टर माधव ने बताया कि वह द्वारका में रहते हैं। 13 मार्च को आदेश आया और कोविड-19 के उपचार के लिए डॉक्टरों व पारामेडिकल स्टाफ की पहली बेंच तैयार हुई। टीम को राजीव गांधी अस्पताल में तैनात किया गया। उन्हें अस्पताल आने और जाने के लिए रोज 90 किलोमीटर का सफर करना पड़ता था। 14 घंटे की ड्यूटी के बाद वह गाड़ी चलाकर घर जाते थे। घर में खुद को परिवार से दूर एक कमरे में बंद कर लेते थे। काम के लंबे घंटे और लंबा सफर करने के कारण उनकी तबीयत खराब हो गई। Source - Hindustan

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