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SIR विवाद पर विपक्ष का बड़ा हमला, बिहार में फिर चुनाव कराने की मांग; चुनाव आयोग ने दिया जवाब

SIR विवाद पर विपक्ष का बड़ा हमला, बिहार में फिर चुनाव कराने की मांग; चुनाव आयोग ने दिया जवाब

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पटना। बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर शुरू हुआ विवाद अब चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और पिछले विधानसभा चुनाव तक पहुंच गया है। चुनाव आयोग के भीतर कथित आपत्तियों से जुड़ी रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने आयोग पर गंभीर सवाल उठाए हैं और कुछ नेताओं ने बिहार में दोबारा विधानसभा चुनाव कराने की मांग भी की है।

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दूसरी ओर चुनाव आयोग ने अपने आधिकारिक जवाब में कहा है कि पिछले एक वर्ष में SIR समेत उसके सभी अंतिम निर्णय पूर्ण आयोग के सर्वसम्मत फैसले रहे हैं। आयोग ने यह भी कहा कि किसी प्रस्ताव के अंतिम निर्णय से पहले अलग-अलग राय, टिप्पणियां और तकनीकी सुझाव आना सामान्य संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा है।

क्या है नया विवाद

Indian Express की एक जांच रिपोर्ट के अनुसार चुनाव आयुक्त Sukhbir Singh Sandhu और Vivek Joshi ने पिछले करीब 10 महीनों में आयोग की कुछ प्रक्रियाओं और फैसलों पर कम से कम 14 मौकों पर आपत्तियां या सवाल दर्ज किए।

रिपोर्ट में मतदाता जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया, Form 6 में बदलाव, चुनावी डेटा तक अधिकारियों की पहुंच और चुनाव आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली से जुड़े मुद्दों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार कुछ मामलों में दोनों आयुक्तों ने अपनी चिंताएं लिखित रूप में दर्ज की थीं।

चुनाव आयोग ने क्या कहा

रिपोर्ट सामने आने के बाद चुनाव आयोग ने विस्तृत जवाब जारी किया।

आयोग का कहना है कि किसी भी बड़े फैसले से पहले मसौदे पर सवाल उठाना, सुझाव देना और कानूनी या तकनीकी पहलुओं की जांच करना सामान्य प्रक्रिया है। आयोग के मुताबिक इन टिप्पणियों को अंतिम निर्णय से अलग करके देखने पर पूरी प्रक्रिया की तस्वीर सामने नहीं आती।

आयोग ने स्पष्ट किया कि SIR सहित पिछले एक वर्ष में उसके सभी अंतिम निर्णय पूर्ण आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

तेजस्वी यादव ने की दोबारा चुनाव की मांग

इस विवाद के बीच बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने बिहार और पश्चिम बंगाल में दोबारा विधानसभा चुनाव कराने की मांग की है।

Times of India के अनुसार तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग का इस्तेमाल BJP के पक्ष में किया गया और SIR की प्रक्रिया से मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए। उन्होंने चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया और चुनाव से जुड़े रिकॉर्ड को लेकर भी सवाल उठाए।

ये तेजस्वी यादव और विपक्ष के राजनीतिक आरोप हैं। उपलब्ध रिपोर्टों में इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। चुनाव आयोग ने अपने जवाब में कहा है कि उसके अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए थे।

कांग्रेस ने पटना में किया प्रदर्शन

बिहार कांग्रेस ने भी चुनाव आयोग के खिलाफ पटना में प्रदर्शन किया। पार्टी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar के इस्तीफे की मांग की।

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि दूसरे चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को नजरअंदाज किया गया और SIR की प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं रही। ये कांग्रेस के आरोप हैं, जबकि आयोग का कहना है कि उसके अंतिम निर्णय पूर्ण आयोग की सहमति से लिए गए।

SIR का सीधा संबंध मतदाता सूची से

SIR यानी Special Intensive Revision का उद्देश्य मतदाता सूची की व्यापक समीक्षा करना है। इस प्रक्रिया में पात्र मतदाताओं को सूची में बनाए रखने और अपात्र या गलत प्रविष्टियों की पहचान करने की प्रक्रिया शामिल होती है।

यही वजह है कि SIR को लेकर पारदर्शिता और दस्तावेजों की जांच का सवाल बेहद महत्वपूर्ण है। किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में होना सीधे उसके मतदान के अधिकार से जुड़ा है।

इसलिए इस पूरी प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि नाम जोड़ने, हटाने और सुधार की प्रक्रिया कितनी स्पष्ट और सत्यापन योग्य है।

आयोग के भीतर मतभेद और अंतिम फैसला अलग बातें

मौजूदा विवाद को समझते समय दो बातों को अलग रखना जरूरी है।

पहली बात यह है कि मीडिया रिपोर्ट के अनुसार आयोग के दो सदस्यों ने अलग-अलग मुद्दों पर आपत्तियां दर्ज की थीं।

दूसरी बात यह है कि चुनाव आयोग का आधिकारिक पक्ष है कि अंतिम निर्णय पूर्ण आयोग द्वारा सर्वसम्मति से लिए गए।

इसलिए किसी आंतरिक टिप्पणी को सीधे अंतिम निर्णय से असहमति के बराबर मानना उचित नहीं होगा। अंतिम आदेश और आधिकारिक रिकॉर्ड इस विवाद को समझने के लिए महत्वपूर्ण होंगे।

अब नजर आगे की प्रक्रिया पर

SIR विवाद के बीच विपक्ष की ओर से चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल लगातार उठाए जा रहे हैं। दूसरी तरफ आयोग अपनी निर्णय प्रक्रिया को नियमों और सर्वसम्मति पर आधारित बता रहा है।

अब आगे इस मामले में सामने आने वाले आधिकारिक दस्तावेज, न्यायिक कार्रवाई और आयोग के नए स्पष्टीकरण महत्वपूर्ण होंगे।

बिहार में अक्टूबर में विधान परिषद की आठ सीटों के चुनाव भी होने हैं। इन सीटों पर 23 अक्टूबर को मतदान और 27 अक्टूबर को मतगणना होगी। ऐसे में चुनावी प्रक्रिया से जुड़े हर घटनाक्रम पर राजनीतिक दलों और मतदाताओं की नजर रहेगी।

मतदाताओं के लिए सबसे जरूरी क्या

राजनीतिक आरोपों से अलग आम मतदाता के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात अपनी मतदाता सूची की स्थिति जांचना है। यदि नाम, पता या अन्य विवरण में कोई गलती है तो निर्धारित चुनावी प्रक्रिया के तहत सुधार या आपत्ति दर्ज की जा सकती है।

SIR को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच मतदाता सूची की पारदर्शिता और नागरिकों के अधिकार का सवाल सबसे महत्वपूर्ण बना हुआ है।

Seemanchal Live इस मामले में चुनाव आयोग के अगले आधिकारिक कदम, राजनीतिक प्रतिक्रियाओं और न्यायिक घटनाक्रम पर नजर बनाए रखेगा।

आपके अनुसार मतदाता सूची में किसी भी बदलाव की स्थिति में सबसे जरूरी क्या होना चाहिए: पारदर्शी सत्यापन, नागरिक को सूचना या शिकायत के समाधान की समयसीमा? अपनी राय Seemanchal Live के साथ साझा करें।

टैग:PoliticsBihar

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