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Bihar PhD Protest Ends: 21 दिन बाद PhD धारकों और Guest Faculty का आंदोलन खत्म, राज्यपाल से दो घंटे की वार्ता में बनी सहमति

Assistant Professor भर्ती नियमों पर फिलहाल रोक; 15 दिनों के भीतर बनेगी कमेटी, 55 वर्ष आयु सीमा, API Score, PhD weightage और Guest Faculty की मांगों की होगी…

Bihar PhD Protest Ends: 21 दिन बाद PhD धारकों और Guest Faculty का आंदोलन खत्म, राज्यपाल से दो घंटे की वार्ता में बनी सहमति

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Assistant Professor भर्ती नियमों पर फिलहाल रोक; 15 दिनों के भीतर बनेगी कमेटी, 55 वर्ष आयु सीमा, API Score, PhD weightage और Guest Faculty की मांगों की होगी समीक्षा पटना, 25 अगस्त 2026: बिहार में Assistant Professor भर्ती से जुड़ी मांगों को लेकर पिछले 21 दिनों से आंदोलन कर रहे PhD धारकों, research scholars और guest faculty members ने अपना आंदोलन समाप्त करने पर सहमति जताई है। सोमवार को बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन के साथ प्रदर्शनकारियों के छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की करीब दो घंटे तक चली बैठक के बाद यह फैसला लिया गया। आंदोलन 4 अगस्त से पटना के गर्दनीबाग में चल रहा था। All PhD Holders and Research Association के बैनर तले अभ्यर्थी Assistant Professor Recruitment Regulations 2026 में बदलाव सहित कई मांगें उठा रहे थे। आंदोलनकारी कुमुद पटेल पूरे आंदोलन के दौरान भूख हड़ताल पर भी रहे। Assistant Professor भर्ती के 2026 नियम फिलहाल स्थगित वार्ता के बाद सबसे महत्वपूर्ण फैसला Statutes for Appointment of Assistant Professors, 2026 को लेकर सामने आया। राज्यपाल सचिवालय के अनुसार इन नियमों को आवश्यक संशोधन होने तक स्थगित रखा जाएगा। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों पर विचार और जरूरी बदलाव होने से पहले इन्हीं नियमों के तहत regular या contractual Assistant Professor recruitment आगे नहीं बढ़ाने पर सहमति बनी है। यह आंदोलनकारियों के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है क्योंकि उनका मुख्य विरोध नई recruitment व्यवस्था के कई प्रावधानों को लेकर था। 15 दिनों में बनेगी कमेटी राज्यपाल मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से विचार-विमर्श के बाद एक विशेष committee गठित करेंगे। इस committee में बिहार के प्रमुख शिक्षाविदों के साथ education administration का अनुभव रखने वाले administrators को शामिल किया जाएगा। कमेटी को 15 दिनों के भीतर गठित करने की बात कही गई है। यही committee आंदोलनकारियों की अलग-अलग मांगों की समीक्षा करेगी और recruitment system में आवश्यक बदलावों पर विचार करेगी। Maximum Age 55 वर्ष करने की मांग Assistant Professor candidates की सबसे प्रमुख मांगों में maximum age limit शामिल है। अभ्यर्थी चाहते हैं कि Assistant Professor भर्ती के लिए अधिकतम आयु सीमा फिर से 55 वर्ष की जाए। उनका तर्क रहा है कि PhD, NET/JRF, research publications और academic experience हासिल करने में कई साल लग जाते हैं। इसलिए अचानक कम age limit लागू होने पर बड़ी संख्या में योग्य और अनुभवी candidates भर्ती प्रक्रिया से बाहर हो सकते हैं। अब गठित होने वाली committee इस मांग की समीक्षा करेगी। Written Exam और API Score से बने Merit List नई भर्ती व्यवस्था में selection process भी बड़ा मुद्दा है। सहमति के मुताबिक committee objective written examination शुरू करने के प्रस्ताव पर विचार करेगी। इसके बाद written examination और Academic Performance Indicator (API) score को जोड़कर merit list तैयार करने की व्यवस्था पर विचार किया जाएगा। Interview में teaching demonstration को शामिल करने का प्रस्ताव भी समीक्षा के दायरे में रहेगा। अगर यह व्यवस्था लागू होती है तो Assistant Professor selection में academic record के साथ candidate की subject knowledge और teaching ability दोनों का मूल्यांकन किया जा सकेगा। 10वीं और 12वीं के Marks हटाने की मांग API calculation को लेकर भी PhD holders ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं। आंदोलनकारियों की मांग है कि Assistant Professor recruitment के API calculation में Matric और Intermediate के marks को शामिल न किया जाए। उनका तर्क है कि विश्वविद्यालय स्तर की teaching position के लिए दशकों पुराने school marks की तुलना में higher education, research और teaching experience को ज्यादा महत्व दिया जाना चाहिए। Committee इस मांग की भी समीक्षा करेगी। PhD को कम से कम 30% Weightage देने की मांग PhD holders की एक और प्रमुख मांग doctorate qualification को मिलने वाले weightage से संबंधित है। प्रस्तावित समीक्षा में PhD qualification को कम से कम 30 weightage देने की मांग पर विचार किया जाएगा। साथ ही NET/JRF की उपयोगिता, research publications और teaching/research experience के लिए स्पष्ट criteria बनाने की मांग भी शामिल है। आंदोलनकारियों का कहना रहा है कि अस्पष्ट criteria होने पर API calculation में अलग-अलग interpretations और विवाद पैदा हो सकते हैं। इसलिए publications और experience की स्पष्ट definition आवश्यक है। Guest Faculty को Minimum Pay और DA का मुद्दा इस आंदोलन में बिहार के विश्वविद्यालयों में वर्षों से काम कर रहे Guest Assistant Professors भी शामिल थे। उनकी मांग है कि eligible guest faculty को contractual Assistant Professors के समान minimum pay scale और Dearness Allowance (DA) दिया जाए। अलग-अलग universities में guest faculty renewal की प्रक्रिया में अंतर होने का मुद्दा भी उठाया गया है। अब committee एक uniform renewal process की संभावना पर विचार करेगी। योग्य Guest Faculty को 65 वर्ष तक काम का मौका? Guest faculty के qualifications, research papers और teaching experience का verification कराने का प्रस्ताव भी सामने आया है। Verification के बाद योग्य पाए जाने वाले guest faculty को 65 वर्ष की उम्र तक काम करने की अनुमति देने की मांग पर committee विचार करेगी। यह बिहार के विश्वविद्यालयों में लंबे समय से पढ़ा रहे हजारों contractual और guest teachers के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा हो सकता है। हर साल Vacancies पर भर्ती की मांग बिहार के universities में Assistant Professor के खाली पद लंबे समय से बड़ा मुद्दा रहे हैं। आंदोलनकारी चाहते हैं कि vacancies जमा होने का इंतजार करने के बजाय हर वर्ष नियमित recruitment process आयोजित की जाए। Committee इस प्रस्ताव पर भी विचार करेगी। अगर नियमित recruitment cycle बनती है तो universities में faculty shortage कम करने और qualified candidates को समय पर अवसर देने में मदद मिल सकती है। UGC Regulation 2018 भी आंदोलन का प्रमुख आधार PhD holders शुरुआत से Assistant Professor appointments में UGC Regulation 2018 और Table 3A लागू करने की मांग कर रहे थे। इसके अलावा domicile policy, recruitment anomalies और guest teachers की समस्याएं भी आंदोलन के प्रमुख मुद्दे रहे। 22 अगस्त को आंदोलनकारियों ने Lok Bhavan की ओर मार्च भी किया था। R-Golumber के पास पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोक दिया था और barricades पार करने की कोशिश के दौरान पुलिस तथा प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई थी। कई लोगों को हिरासत में भी लिया गया था। दो घंटे की बैठक के बाद निकला रास्ता लगातार बढ़ते आंदोलन के बीच सोमवार को छह सदस्यीय delegation को राज्यपाल से मिलने का मौका मिला। Lok Bhavan में करीब दो घंटे तक बातचीत चली। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने hunger strike और आंदोलन वापस लेने का आश्वासन दिया। इस समझौते से 21 दिनों से चल रहा आंदोलन फिलहाल समाप्त हो गया है, लेकिन असली परीक्षा अब committee की recommendations और उनके implementation की होगी। आंदोलनकारियों की मांगें सीधे बिहार की higher-education recruitment policy से जुड़ी हैं। इसलिए आने वाले 15 दिन बेहद महत्वपूर्ण होंगे। अगर committee समय पर बनती है और age limit, API calculation, PhD weightage, written examination तथा guest faculty की service conditions पर ठोस recommendations आती हैं, तो बिहार की Assistant Professor भर्ती व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल सबसे बड़ा परिणाम यही है कि 2026 Assistant Professor recruitment rules आवश्यक संशोधन तक स्थगित रहेंगे और 21 दिनों से आंदोलन कर रहे PhD holders तथा guest faculty ने राज्यपाल से बातचीत के बाद अपना आंदोलन समाप्त करने पर सहमति दे दी है।

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