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Politics

दिल्ली की हवा बन चुकी है ज़हर: नोएडा से दिल्ली आने वालों की आँखों में जलन, सांस लेने में मुश्किल — कब जागेगी सरकार?

नई दिल्ली, 3 नवंबर: दिल्ली की हवा अब सांस नहीं — सज़ा देने लगी है। राजधानी का प्रदूषण स्तर इतना बढ़ गया है कि सामान्य लोगों के लिए भी बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। नोएडा से रोज़ाना दिल्ली आने-जाने वाले लोगों ने बताया है कि जैसे ही वे दिल्ली की सीमा पार करते हैं, उनकी आँखों में जलन, पानी आना और गले

दिल्ली की हवा बन चुकी है ज़हर: नोएडा से दिल्ली आने वालों की आँखों में जलन, सांस लेने में मुश्किल — कब जागेगी सरकार?

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नई दिल्ली, 3 नवंबर: दिल्ली की हवा अब सांस नहीं — सज़ा देने लगी है। राजधानी का प्रदूषण स्तर इतना बढ़ गया है कि सामान्य लोगों के लिए भी बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। नोएडा से रोज़ाना दिल्ली आने-जाने वाले लोगों ने बताया है कि जैसे ही वे दिल्ली की सीमा पार करते हैं, उनकी आँखों में जलन, पानी आना और गले में खराश शुरू हो जाती है। नोएडा निवासी एक युवक ने बताया — “मैं रोज़ नोएडा से दिल्ली आता हूँ। जैसे ही दिल्ली में प्रवेश करता हूँ, आँखों में जलन और पानी आने लगता है। अगर यह हाल ऐसे ही रहे तो न बुज़ुर्ग बचेंगे, न युवा। और अगर हमने इसे सिर्फ सरकार के भरोसे छोड़ दिया — तो बहुत देर हो जाएगी।” दिल्ली पर छाया ज़हरीला धुंआ पर्यावरण एजेंसी SAFAR के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली का AQI 480 तक पहुंच गया है — जो “Severe Plus” श्रेणी में आता है। इसका मतलब है — हर सांस में ज़हर। डॉक्टरों के मुताबिक लगातार ऐसी हवा में रहने से फेफड़ों की बीमारी, हार्ट प्रॉब्लम, आंखों में संक्रमण और अस्थमा जैसी दिक्कतें तेजी से बढ़ रही हैं। अस्पतालों में बढ़ी भीड़, बुज़ुर्ग सबसे ज़्यादा प्रभावित दिल्ली के अस्पतालों में अब हर दिन सैकड़ों मरीज प्रदूषण से जुड़ी दिक्कतों के साथ पहुंच रहे हैं। बुज़ुर्गों में ऑक्सीजन की कमी और बच्चों में खांसी-जुकाम के केस सबसे ज़्यादा बढ़े हैं। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है — अगर हालात नहीं सुधरे, तो आने वाले दिनों में यह स्वास्थ्य आपातकाल बन सकता है। नागरिकों की चेतावनी — अब नहीं तो कभी नहीं लोग अब खुलकर कह रहे हैं कि दिल्ली को बचाने के लिए सिर्फ़ सरकार का इंतज़ार करना बेकार है। अब वक्त है कि नागरिक, प्रशासन, एनजीओ और प्राइवेट सेक्टर सब एकजुट हों। हर घर को यह तय करना होगा — कार शेयरिंग, पब्लिक ट्रांसपोर्ट, पेड़ लगाना और मास्क पहनना — अब यही ज़िम्मेदारी है, सिर्फ़ मजबूरी नहीं। निष्कर्ष दिल्ली अब दम तोड़ रही है — और अगर हम सब नहीं जागे, तो अगली पीढ़ी को सांस लेने के लिए मास्क नहीं, ऑक्सीजन सिलेंडर चाहिए होंगे। यह सिर्फ़ सरकार का नहीं, हम सबका युद्ध है — सांसों के लिए।

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