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रघुवर दास पर भारी पड़ा हेमंत सोरेन का चेहरा, जानिए किन वजहों से कमजोर पड़ी भाजपा

रघुवर दास पर भारी पड़ा हेमंत सोरेन का चेहरा, जानिए किन वजहों से कमजोर पड़ी भाजपा झारखंड विधानसभा चुनावों के नतीजों से कई संकेत मिलते हैं। यह नतीजे राज्य सरकार के पिछले पांच साल के कामकाज का लेखा-जोखा प्रदर्शित करते हैं तो यह भी दिखाते हैं कि राज्य की राजनीति में केंद्रीय मुद्दे असर डालने में सफल नहीं

रघुवर दास पर भारी पड़ा हेमंत सोरेन का चेहरा, जानिए किन वजहों से कमजोर पड़ी भाजपा

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रघुवर दास पर भारी पड़ा हेमंत सोरेन का चेहरा, जानिए किन वजहों से कमजोर पड़ी भाजपा झारखंड विधानसभा चुनावों के नतीजों से कई संकेत मिलते हैं। यह नतीजे राज्य सरकार के पिछले पांच साल के कामकाज का लेखा-जोखा प्रदर्शित करते हैं तो यह भी दिखाते हैं कि राज्य की राजनीति में केंद्रीय मुद्दे असर डालने में सफल नहीं हुए। केंद्र सरकार के कामकाज, राम मंदिर निर्माण और नागरिकता जैसे कानून से भाजपा को इस चुनाव में कोई फायदा नहीं पहुंचा। जनता की नाराजगी और नेतृत्व से नुकसान : झामुमो का सबसे बड़े दल के रूप में उभरकर आना और गठबंधन को पूर्ण बहुमत मिलने से दो बातें साफ हो जाती हैं। एक, राज्य सरकार के खिलाफ जनता में खासी नाराजगी थी। क्योंकि झामुमो को अभूतपूर्व सफलता मिली है। वह सबसे बड़े दल के रूप में उभरा है। दूसरे, मुख्यमंत्री रघुबर दास के नेतृत्व को आगे भी जारी रखे जाने के भाजपा की घोषणा से नुकसान हुआ। हेमंत विपक्ष के लिए लाभकारी : गठबंधन द्वारा हेमंत सोरेन को मुख्यमंत्री का उम्मीदवार घोषित करना विपक्ष के लिए लाभकारी रहा। जनता ने दोनों नेताओं की तुलना की। यह माना जा रहा है कि यदि चुनाव शुरू होने से पूर्व नेतृत्व बदला जाता तो, हो सकता है कि स्थिति बदल जाती। लेकिन ऐन चुनावों से पूर्व नेतृत्व में बदलाव करना किसी दल के लिए आसान नहीं होता। ऐसा करना विपक्ष के हाथ में एक नया मुद्दा थमाने जैसा होता। भाजपा ने पूरी ताकत झोंकी थी : राज्य में वापसी को लेकर भाजपा आश्वस्त नहीं थी। यही कारण है कि पार्टी ने इस चुनाव में पूरी ताकत झोंकी। अयोध्या पर फैसला आने के बाद यह पहला चुनाव था। राम मंदिर मुद्दे को भी भाजपा की तरफ से भुनाने की भरपूर कोशिश की गई। नागरिकता कानून के विरोध करने वालों को भी पार्टी के शीर्ष नेता अपनी सभाओं में कोसते थे। भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे को आगे रखकर चुनाव लड़ा। लेकिन इसके बावजूद भाजपा सूबे को बचा पाने में असफल रही है। इसके अलावा आजसू एवं अन्य छोटे दलों का साथ नहीं होना भी भाजपा के लिए खराब रहा। लोकसभा चुनाव के बाद लगातार कमजोर यहां यह देखना जरूरी है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में भारी बहुमत से जीतने के बावजूद तीन राज्यों के चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन कमजोर रहा है। हरियाणा में उसकी सात सीटें कम हुई। हालांकि गठजोड़ से सरकार बनाने में भाजपा वहां सफल रही। इसी प्रकार महाराष्ट्र में भाजपा ने 17 सीटें खोई और शिवसेना से संबंध टूटने के कारण सरकार भी नहीं बना पाई। अब तीसरा राज्य झारखंड है। Source-HINDUSTAN

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