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दिल्ली समेत देश के तमाम राज्यों में श्रम कार्यालयों पर हुआ निर्माण मज़दूरों का प्रदर्शन

दिल्ली समेत देश के तमाम राज्यों में श्रम कार्यालयों पर हुआ निर्माण मज़दूरों का प्रदर्शन 20 नवंबर 2019, दिल्ली : दिल्ली के विभिन्न जिला श्रम कार्यालयों पर ऐक्टू (AICCTU) से सम्बद्ध यूनियनों ने आज विरोध प्रदर्शन किया। ये प्रदर्शन ऐक्टू (AICCTU) व आल इंडिया कंस्ट्रक्शन वर्कर्स फेडरेशन (AICWF) के द्वारा

दिल्ली समेत देश के तमाम राज्यों में श्रम कार्यालयों पर हुआ निर्माण मज़दूरों का प्रदर्शन
दिल्ली समेत देश के तमाम राज्यों में श्रम कार्यालयों पर हुआ निर्माण मज़दूरों का प्रदर्शन 20 नवंबर 2019, दिल्ली : दिल्ली के विभिन्न जिला श्रम कार्यालयों पर ऐक्टू (AICCTU) से सम्बद्ध यूनियनों ने आज विरोध प्रदर्शन किया। ये प्रदर्शन ऐक्टू (AICCTU) व आल इंडिया कंस्ट्रक्शन वर्कर्स फेडरेशन (AICWF) के द्वारा आयोजित देशव्यापी विरोध दिवस के तहत दिल्ली समेत देश तमाम राज्यों में किया गया। प्रदर्शन मुख्यतः, मोदी सरकार द्वारा श्रम-कानूनों को खत्म करने, बेरोज़गारी-महंगाई पर रोक लगाने, संघ-भाजपा द्वारा फैलाये जा रहे साम्प्रदायिकता के खिलाफ किया गया। आर्थिक मंदी, बेरोज़गारी और मंहगाई से ध्यान हटाने के लिए पूरे देश को धर्म-सम्प्रदाय के नाम पर बांट रही है मोदी सरकार दिल्ली के उत्तरी, उत्तर-पश्चिमी, पूर्वी, उत्तर-पूर्वी, दक्षिणी इत्यादि जिलों के उप-श्रमायुक्त कार्यालयों पर सैकड़ों मज़दूरों ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया और ज्ञापन सौंपा। दक्षिणी दिल्ली के पुष्प भवन श्रम कार्यालय में प्रदर्शनकारी मज़दूरों को ऐक्टू दिल्ली के अध्यक्ष कामरेड संतोष रॉय ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि, "मोदी सरकार देश के गरीबों को, मज़दूरों को बांट देना चाहती है। वो चाहती है कि गरीब और मज़दूर धर्म के नाम पर लड़ते रहे और सरकार चुपचाप देश को अडानी-अम्बानी-टाटा के हाथों बेच दे। निर्माण मज़दूरों का वेलफेयर बोर्ड खत्म करके और श्रम कानूनों का सफाया करके मोदी सरकार मज़दूरों को बदहाली की ओर धकेल रही है, हमें इसका डटकर मुकाबला करना होगा।" गौरतलब है कि संघ से जुड़े 'बीएमएस' को छोड़कर तमाम केंद्रीय ट्रेड यूनियने लगातार मज़दूरों के अधिकारों पर हो रहे हमलों के खिलाफ सरकार को घेरने की कोशिश कर रही हैं। श्रम-कानूनों को कोड बिल लाकर खत्म करना, मज़दूरों को गुलाम बनाने की साजिश है पूर्वी और उत्तर पूर्वी जिले में काम करनेवाले श्रमिकों ने झिलमिल कॉलोनी स्थित उप-श्रमायुक्त कार्यालय पर प्रदर्शन किया। यहां उपस्थित मज़दूरों ने एक सुर में मोदी सरकार द्वारा निर्माण मज़दूरों के कल्याण के लिए बने कानूनों के साथ हो रही छेड़छाड़ का विरोध किया। अपनी बात रखते हुए निर्माण कार्य करनेवाले एक मज़दूर ने बताया कि, "कई बार कार्यस्थलों पर दुर्घटनाएं हो जाती हैं, जूते घिसने के बावजूद न तो हमे मुआवजा मिलता है और ना ही मालिक को सज़ा। जब श्रम कानून रहते हुए ये हालात हैं, तो इनके खत्म हो जाने से तो मज़दूर गुलाम बनकर रह जाएगा।" धरनास्थल पर मौजूद मज़दूरों को संबोधित करते हुए ऐक्टू दिल्ली के कार्यकारी अध्यक्ष वी.के.एस गौतम ने बताया कि आनेवाली 8 जनवरी 2020 को इन्ही मुद्दों को लेकर, संयुक्त ट्रेड यूनियनों द्वारा देशव्यापी हड़ताल का आह्वान है। उन्होंने हड़ताल में पूरी ताकत लगाने की बात कही और धर्म-सम्प्रदाय से ऊपर उठकर व्यापक बनाने पर ज़ोर दिया। प्रदूषण रोकने के नाम पर निर्माण-कार्य पर लगे रोक से बेरोज़गार हो रहे हैं लाखों निर्माण मज़दूर एक ओर तो निजी वाहनों से लगनेवाले जाम और प्रदूषण से सभी दिल्ली वाले परेशान हैं, वहीं बिना वैकल्पिक रोज़गार या बेरोज़गारी भत्ते के घोषणा के, लगातार निर्माण-कार्य पर चल रहे रोक से लाखों मज़दूर बेरोज़गार हो गए हैं। उत्तरी व उत्तर-पश्चिमी जिले में स्थित श्रम कार्यालय पर भी धरने में कई मज़दूरों ने हिस्सा लिया। मूलतः बिहार से आनेवाले, राजीव कुमार पंडित, जो कि स्वयं मिस्त्री का काम करते हैं और 'बिल्डिंग वर्कर्स यूनियन' के अध्यक्ष हैं ने बताया कि,"मज़दूर वर्ग बढ़ रहे प्रदूषण के चलते तो परेशान है ही, प्रदूषण रोकने के नाम पर हो रहे काम-बन्दी से उसके भूखों मरने की नौबत आ गई है। हमारे लिए या तो अमीरों और सरकारी नीतियों द्वारा बढ़ रहे प्रदूषण को झेलने का विकल्प है, या निर्माण-कार्य बंद हो जाने के चलते भूख से मर जाने का। हमारी मांग है कि सरकार काम-बन्दी के दौरान सभी निर्माण मज़दूरों को बेरोज़गारी भत्ता देने की व्यवस्था करे।" राजीव ने बताया कि पिछले साल भी काम बंद होने के चलते मज़दूरों की स्थिति काफी खराब हो गई थी। प्रदर्शन में मौजूद सभी मज़दूरों ने सरकार से राहत की मांग की और एकजुट होकर संघर्ष करने की बात कही।

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