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संसदीय समिति ने भूमिगत कोयला खनन परियोजनाओं के लिए मंजूरी प्रक्रिया आसान करने की सिफारिश की

नयी दिल्ली: कोयला क्षेत्र में सुधार की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए कोयला, खान और इस्पात संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने भूमिगत कोयला खनन परियोजनाओं के लिए मंजूरी प्रक्रिया को सरल और मानकीकृत बनाने की सिफारिश की है। समिति ने कहा है कि वर्तमान में भूमिगत कोयला खनन परियोजनाओं को भी बड़ी खुली (ओपन-कास्ट

संसदीय समिति ने भूमिगत कोयला खनन परियोजनाओं के लिए मंजूरी प्रक्रिया आसान करने की सिफारिश की

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नयी दिल्ली: कोयला क्षेत्र में सुधार की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए कोयला, खान और इस्पात संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने भूमिगत कोयला खनन परियोजनाओं के लिए मंजूरी प्रक्रिया को सरल और मानकीकृत बनाने की सिफारिश की है। समिति ने कहा है कि वर्तमान में भूमिगत कोयला खनन परियोजनाओं को भी बड़ी खुली (ओपन-कास्ट) कोयला खदानों जैसी जटिल मंजूरी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है, जबकि इन परियोजनाओं का पर्यावरणीय प्रभाव अपेक्षाकृत कम होता है। इससे कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं में अनावश्यक देरी हो रही है। सरकार ने वर्ष 2030 तक भूमिगत कोयला खदानों से 10 करोड़ टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य तय किया है। ऐसे में समिति का मानना है कि नीति सरलीकरण से इस लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी। कम पर्यावरणीय प्रभाव का लाभ समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि भूमिगत कोयला खनन से: सतह पर व्यवधान न्यूनतम रहता है भूमि, वन और बुनियादी ढांचे का संरक्षण होता है भूमि पुनर्वास की लागत कम होती है अप्रत्यक्ष ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी आती है इसके अलावा, यह पद्धति उच्च गुणवत्ता वाले गहरे कोयला भंडार तक पहुंच प्रदान करती है और मौसम की परवाह किए बिना पूरे वर्ष संचालन को संभव बनाती है। मानकीकृत प्रोटोकॉल पर जोर रिपोर्ट में कहा गया है कि कम पर्यावरणीय प्रभाव के बावजूद, कई भूमिगत परियोजनाओं को समान दस्तावेजी और मंजूरी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है, जिससे परियोजनाएं समय पर शुरू नहीं हो पातीं। इसलिए समिति ने भूमिगत कोयला खनन के लिए नीति को सरल बनाने और मानकीकृत प्रोटोकॉल अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। ओपन-कास्ट खनन के लिए भी सुझाव इसके साथ ही समिति ने खुले में खनन (Open-Cast Mining) के लिए भी एकल-खिड़की मंजूरी प्रणाली के तहत: मानक संदर्भ शर्तें (TOR) मानक संचालन प्रक्रियाएं (SOP) लागू करने की सिफारिश की है, ताकि परियोजनाओं को समय पर मंजूरी मिल सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन सिफारिशों को लागू किया गया, तो भारत के ऊर्जा क्षेत्र को मजबूती मिलेगी और कोयला उत्पादन लक्ष्य को हासिल करना आसान होगा।

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