पटना। बिहार सरकार ने बुधवार को कैबिनेट की बैठक में 24 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई बैठक में शिक्षा, पुलिस आधुनिकीकरण, डेयरी, पशुपालन, स्वास्थ्य, जल संसाधन और किसानों से जुड़े कई फैसले लिए गए।
कैबिनेट के फैसलों में बेगूसराय में रामधारी सिंह दिनकर विश्वविद्यालय और पटना में मां सीता विश्वविद्यालय की स्थापना, पुलिस के लिए 50 आधुनिक ड्रोन की खरीद और कोसी क्षेत्र में डेयरी विकास के लिए 126.07 करोड़ रुपये की योजनाएं प्रमुख हैं।
बेगूसराय और पटना में दो नए विश्वविद्यालय
कैबिनेट ने बिहार विशिष्ट विश्वविद्यालय अधिनियम 2026 के तहत बेगूसराय में रामधारी सिंह दिनकर विश्वविद्यालय की स्थापना को मंजूरी दी है। विश्वविद्यालय में पदाधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन आदि के लिए 15 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है।
इसके साथ ही पटना में मां सीता विश्वविद्यालय की स्थापना को भी मंजूरी मिली है। इसके लिए भी वेतन आदि मद में 15 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है।
दोनों विश्वविद्यालयों की स्थापना से संबंधित क्षेत्रों में उच्च शिक्षा के नए विकल्प विकसित होने की उम्मीद है। हालांकि विश्वविद्यालयों की वास्तविक उपयोगिता इस बात पर निर्भर करेगी कि संस्थानों में पाठ्यक्रम, शिक्षक, बुनियादी सुविधाएं और शैक्षणिक व्यवस्था कितनी तेजी से तैयार होती है।
पुलिस को मिलेंगे 50 आधुनिक ड्रोन
कैबिनेट ने पुलिस आधुनिकीकरण योजना के तहत 50 आधुनिक ड्रोन खरीदने की मंजूरी दी है। इसके लिए 24.50 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है।
इन ड्रोन का इस्तेमाल भीड़ नियंत्रण और प्रबंधन, नदी क्षेत्र में ऑपरेशन, नक्सल विरोधी अभियान, अपराध नियंत्रण और आपदा प्रबंधन जैसे कार्यों में किया जाएगा।
बिहार जैसे बड़े और बाढ़ प्रभावित राज्य में ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल पुलिस और प्रशासन के लिए निगरानी तथा आपदा प्रबंधन में उपयोगी हो सकता है।
कोसी क्षेत्र के लिए 126 करोड़ से ज्यादा की डेयरी योजनाएं
सीमांचल और कोसी क्षेत्र के लिहाज से कैबिनेट का एक महत्वपूर्ण फैसला डेयरी विकास से जुड़ा है।
सात निश्चय-3 के तहत सुपौल, मधेपुरा और सहरसा में डेयरी क्षेत्र के विकास के लिए 126.07 करोड़ रुपये के अनुमानित खर्च को मंजूरी दी गई है।
इस योजना में दही प्लांट, प्रीमियम आइसक्रीम प्लांट, टोटल मिक्स्ड राशन प्लांट, बछड़ा हीफर फार्म, सीमेन, नई दुग्ध सहकारी समितियां, मिल्क चिलिंग प्लांट और इंस्टेंट मिल्क चिलिंग सिस्टम जैसी परियोजनाएं शामिल हैं।
इन योजनाओं का उद्देश्य दूध उत्पादन और उससे जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है।
नवादा में चीनी मिल को मंजूरी
कैबिनेट ने नवादा जिले के वारिसलीगंज में नई चीनी मिल की स्थापना से संबंधित जमीन हस्तांतरण को भी मंजूरी दी है।
सरकार के अनुसार इस परियोजना में 500 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्रस्तावित है और नवादा, नालंदा, शेखपुरा तथा जमुई के हजारों किसानों को इसका लाभ मिल सकता है।
इसके लिए नवादा जिले में 99.39 एकड़ सरकारी जमीन को गन्ना उद्योग विभाग को हस्तांतरित करने की मंजूरी दी गई है।
बिजली कर्मचारियों के लिए 757 करोड़ रुपये
पूर्ववर्ती बिहार राज्य विद्युत बोर्ड के पदाधिकारियों और कर्मचारियों के 31 अक्टूबर 2012 तक के अनफंडेड टर्मिनल बेनिफिट दायित्व के विरुद्ध वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 757.63 करोड़ रुपये उपलब्ध कराने की स्वीकृति दी गई है।
यह राशि बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड को पांच समान किस्तों में उपलब्ध कराई जाएगी।
पुलिस और मद्यनिषेध विभाग को 336 करोड़ से ज्यादा
जिला पुलिस, रेल पुलिस, बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस, मद्यनिषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो को मजबूत करने के लिए उपकरण और उपस्करों की खरीद सहित करीब 336.85 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है।
इसके साथ ही पुलिस आधुनिकीकरण के तहत अलग से 50 ड्रोन की खरीद को भी मंजूरी मिली है।
12 चिकित्सा संस्थानों में ई-सुश्रुत एनएक्स
स्वास्थ्य क्षेत्र में भी कैबिनेट ने महत्वपूर्ण फैसला लिया है। राज्य के 12 चिकित्सा संस्थानों में सी-डैक द्वारा विकसित ई-सुश्रुत एनएक्स एप्लीकेशन लागू करने की योजना को मंजूरी दी गई है।
इसके संचालन पर तीन वर्षों में 29.79 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। योजना के संतोषजनक संचालन की स्थिति में आगे दो वर्षों के लिए विस्तार का प्रावधान भी रखा गया है।
जल संसाधन विकास निगम का गठन
कैबिनेट ने बिहार जल संसाधन विकास निगम लिमिटेड के गठन को भी मंजूरी दी है। इसके अलावा मुख्यमंत्री गौधन विकास ऋण योजना को वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2028-29 तक तीन वर्षों के लिए मंजूरी दी गई है। इसके लिए करीब 160 करोड़ रुपये के अनुमानित खर्च को स्वीकृति मिली है।
मछली पालन के लिए 195 करोड़ रुपये की परियोजना
मत्स्य पालन और जलीय कृषि से जुड़े बुनियादी ढांचे के विकास के लिए चंपारण क्षेत्र में प्रस्तावित परियोजना के लिए 195.28 करोड़ रुपये की लागत को मंजूरी दी गई है।
सरकार ने मत्स्य क्षेत्र से जुड़े आयोग के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों के मानदेय तथा सुविधाओं में बदलाव से संबंधित प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है।
अब नजर फैसलों के जमीन पर उतरने पर
कैबिनेट के फैसलों में शिक्षा से लेकर पुलिस, स्वास्थ्य, डेयरी और कृषि तक कई क्षेत्रों को शामिल किया गया है। खासकर नए विश्वविद्यालय, कोसी क्षेत्र की डेयरी परियोजनाएं और नवादा की चीनी मिल जैसे फैसलों का असर आने वाले वर्षों में दिखाई दे सकता है।
लेकिन किसी भी सरकारी घोषणा की वास्तविक सफलता उसके क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। अब देखना होगा कि स्वीकृत परियोजनाओं पर काम कब शुरू होता है, उन्हें पूरा करने की समयसीमा क्या रहती है और इनका लाभ आम लोगों तक कितनी तेजी से पहुंचता है।
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