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बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ेंगे भोजपुरी, मैथिली समेत छह क्षेत्रीय भाषाएं, पहली-दूसरी कक्षा से होगी शुरुआत

बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ेंगे भोजपुरी, मैथिली समेत छह क्षेत्रीय भाषाएं, पहली-दूसरी कक्षा से होगी शुरुआत

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पटना। बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छोटे बच्चों के लिए शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। राज्य सरकार ने कक्षा एक और दो के विद्यार्थियों के लिए छह क्षेत्रीय भाषाओं को पढ़ाई में शामिल करने का निर्णय लिया है। यह व्यवस्था आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से शुरू करने की योजना है। इसका उद्देश्य बच्चों को उनकी मातृभाषा और स्थानीय बोली से जोड़ना तथा शुरुआती शिक्षा को अधिक सहज बनाना है।

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बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के अनुसार, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों के तहत यह कदम उठाया गया है। राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद यानी एससीईआरटी को इन भाषाओं में पाठ्यपुस्तक तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है।

इन छह क्षेत्रीय भाषाओं में तैयार होंगी किताबें

सरकार की इस पहल के तहत जिन छह क्षेत्रीय भाषाओं को शामिल किया गया है, उनमें भोजपुरी, मगही, सुरजापुरी, बज्जिका, मैथिली और अंगिका शामिल हैं।

एससीईआरटी इन भाषाओं में कक्षा एक और दो के लिए पाठ्यपुस्तकें तैयार कर रहा है। किताबों को बनाने में शिक्षकों और संबंधित भाषाओं के विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। पाठ्यपुस्तकों की सामग्री को अंतिम रूप देने के लिए कार्यशालाएं भी आयोजित की जा रही हैं।

बिहार में अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग भाषाएं और बोलियां प्रचलित हैं। ऐसे में स्थानीय भाषा में पढ़ाई की सामग्री उपलब्ध होने से बच्चों को स्कूल की शिक्षा और घर में बोली जाने वाली भाषा के बीच बेहतर तालमेल बनाने में मदद मिल सकती है।

आगे कक्षा तीन से पांच तक भी होगी व्यवस्था

पहले चरण में यह पहल कक्षा एक और दो के विद्यार्थियों के लिए शुरू की जाएगी। सरकार की योजना है कि आने वाले समय में इसे कक्षा तीन, चार और पांच तक भी विस्तारित किया जाए।

इन कक्षाओं के लिए भी संबंधित क्षेत्रीय भाषाओं में पाठ्यपुस्तकें तैयार करने की योजना है। हालांकि, इसके विस्तार की समयसीमा और विस्तृत पाठ्यक्रम को लेकर आगे की जानकारी का इंतजार है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 से जुड़ी पहल

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में शुरुआती शिक्षा के दौरान बच्चों की मातृभाषा, घरेलू भाषा या स्थानीय भाषा के उपयोग पर जोर दिया गया है। नीति में संभव होने पर कम से कम कक्षा पांच तक स्थानीय भाषा में शिक्षा देने की सिफारिश की गई है।

बिहार सरकार की यह पहल इसी दिशा में उठाया गया कदम मानी जा रही है। शुरुआती कक्षाओं में परिचित भाषा के उपयोग से बच्चों को विषयों की बुनियादी समझ विकसित करने में सहायता मिल सकती है।

शिक्षकों और पाठ्यपुस्तकों की तैयारी महत्वपूर्ण

इस योजना को सफल बनाने के लिए क्षेत्रीय भाषाओं में गुणवत्तापूर्ण पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता जरूरी होगी। इसके साथ ही शिक्षकों को संबंधित भाषा में पढ़ाने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण देना भी महत्वपूर्ण रहेगा।

बिहार की क्षेत्रीय भाषाएं राज्य की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। स्कूलों में इनके अध्ययन से बच्चों को अपनी भाषा, संस्कृति और स्थानीय परिवेश से जुड़ने का अवसर मिलेगा।

फिलहाल एससीईआरटी की ओर से कक्षा एक और दो के लिए पुस्तकों को तैयार करने का कार्य किया जा रहा है। आगामी शैक्षणिक सत्र में इस योजना के लागू होने के बाद इसकी वास्तविक प्रगति और प्रभाव सामने आएगा।

इस पहल से बिहार के सरकारी स्कूलों में शुरुआती शिक्षा को बच्चों की भाषाई पृष्ठभूमि के अनुरूप बनाने की दिशा में एक नया प्रयास शुरू होगा।

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