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बिहार के गांवों में 22 हजार करोड़ की योजनाएं, 3 लाख विकास कार्यों का लक्ष्य; ग्रामीणों को साल में 125 दिन रोजगार

बिहार के गांवों में 22 हजार करोड़ की योजनाएं, 3 लाख विकास कार्यों का लक्ष्य; ग्रामीणों को साल में 125 दिन रोजगार

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पटना। बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आधारभूत संरचना को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने बड़ी योजना तैयार की है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) यानी VB-G RAM G के तहत 22 हजार करोड़ रुपये की विभिन्न योजनाओं को शामिल करने का निर्देश दिया है। सरकार का लक्ष्य मिशन के अंतर्गत योजनाओं की संख्या डेढ़ लाख से बढ़ाकर तीन लाख करना है।

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5 नवंबर 2026 को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में पटना स्थित लोक सेवक आवास के संकल्प सभागार में मिशन की समीक्षा बैठक हुई। बैठक में ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों ने योजना की कार्ययोजना और क्रियान्वयन की जानकारी दी।

ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों के रोजगार की गारंटी

VB-G RAM G मिशन के तहत ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के रोजगार की गारंटी दी गई है। योजना में केंद्र और राज्य सरकार के बीच 60:40 के अनुपात में वित्त पोषण की व्यवस्था है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि काम करने वाले ग्रामीण परिवारों को निर्धारित समयसीमा के भीतर मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने 15 दिनों के अंदर मजदूरी भुगतान पर विशेष जोर दिया।

इस व्यवस्था का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाना और स्थानीय स्तर पर आजीविका को मजबूत करना है।

डेढ़ लाख से बढ़कर तीन लाख होंगी योजनाएं

मुख्यमंत्री ने समीक्षा बैठक में बताया कि मिशन के तहत अब तक लगभग 1.5 लाख योजनाएं ली गई हैं। उन्होंने इनकी संख्या बढ़ाकर तीन लाख करने का लक्ष्य निर्धारित करने का निर्देश दिया।

इन योजनाओं के जरिए गांवों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने पर ध्यान दिया जाएगा। ग्रामीण विकास से जुड़े विभिन्न विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए गए हैं।

जिलाधिकारियों को योजनाओं की नियमित निगरानी करने की जिम्मेदारी भी दी गई है, ताकि कार्य समय पर और निर्धारित गुणवत्ता के अनुसार पूरे हों।

आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण पर 12 लाख रुपये

ग्रामीण क्षेत्रों में आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण के लिए प्रति केंद्र 12 लाख रुपये खर्च करने का निर्देश दिया गया है। इसके अतिरिक्त केंद्रों की साज-सज्जा, पठन-पाठन सामग्री और फर्नीचर के लिए दो लाख रुपये अलग से खर्च किए जाएंगे।

इस प्रकार प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र के निर्माण और सुविधाओं के लिए कुल 14 लाख रुपये का प्रावधान बताया गया है।

सरकार का लक्ष्य है कि गांवों में बच्चों के लिए बेहतर प्रारंभिक शिक्षा और पोषण संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र और ग्रामीण हाट पर भी जोर

मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में कई प्रकार के विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। इनमें आंगनबाड़ी केंद्र, स्कूलों में अतिरिक्त कक्षाएं, स्वास्थ्य केंद्र, ग्रामीण हाट और विद्यार्थियों के लिए खेल मैदान शामिल हैं।

इसके साथ ही जल संरक्षण, वृक्षारोपण और ग्रामीण आधारभूत संरचना के विकास पर भी ध्यान दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने ग्राम पंचायतों के विकास के लिए चार प्रमुख क्षेत्रों में योजनाएं तैयार करने का निर्देश दिया है। इनमें जल सुरक्षा, ग्रामीण आधारभूत संरचना, आजीविका संवर्धन और आपदा प्रबंधन शामिल हैं।

जल संरक्षण और रोजगार सृजन को मिलेगी प्राथमिकता

बिहार के ग्रामीण इलाकों में भूजल स्तर बनाए रखने और भविष्य की जल जरूरतों को पूरा करने के लिए जल संरक्षण से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया गया है।

वृक्षारोपण और जल संचयन के कार्यों को एक साथ आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। इन कार्यों से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा होने के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिल सकती है।

योजनाओं के क्रियान्वयन पर रहेगी निगरानी

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को मिशन के सभी प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करने और योजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का निर्देश दिया है।

अब इस योजना के तहत तीन लाख कार्यों का लक्ष्य हासिल करने, ग्रामीण परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराने और गांवों की बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने पर सरकार का ध्यान रहेगा।

हालांकि, 22 हजार करोड़ रुपये की योजनाओं का वास्तविक क्रियान्वयन, जिलावार कार्यों का चयन और रोजगार उपलब्धता की प्रगति आगे जारी होने वाले विभागीय विवरणों से स्पष्ट होगी।

बिहार सरकार की इस पहल से ग्रामीण विकास और रोजगार सृजन को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

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