पटना। बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर शुरू हुआ विवाद अब चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली तक पहुंच गया है। चुनाव आयोग के दो सदस्यों की ओर से अलग-अलग समय पर सवाल और आपत्तियां उठाए जाने की मीडिया रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने आयोग पर सवाल खड़े किए हैं।
दूसरी ओर चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों पर अपना आधिकारिक पक्ष रखते हुए कहा है कि आंतरिक स्तर पर सवाल, सुझाव और टिप्पणियां किसी बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था की सामान्य निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग ने कहा कि पिछले एक साल में लिए गए उसके सभी अंतिम फैसले पूर्ण आयोग के सर्वसम्मत निर्णय रहे हैं।
रिपोर्ट में क्या दावा किया गया
Indian Express की एक जांच रिपोर्ट के अनुसार चुनाव आयुक्त Sukhbir Singh Sandhu और Vivek Joshi ने करीब 10 महीनों की अवधि में आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर कई मौकों पर आपत्तियां या सवाल दर्ज किए थे।
रिपोर्ट में SIR से जुड़े कुछ फैसलों, मतदाता सूची के डेटा और Form 6 में बदलाव जैसे मुद्दों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार दोनों आयुक्तों ने कुछ मामलों में अपनी चिंताएं आंतरिक स्तर पर दर्ज कराई थीं।
यह रिपोर्ट सामने आने के बाद चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई।
चुनाव आयोग ने क्या जवाब दिया
चुनाव आयोग ने कहा कि किसी प्रस्ताव के अंतिम रूप लेने से पहले उसके मसौदे पर सवाल उठाना या सुझाव देना संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा है।
आयोग के अनुसार SIR समेत पिछले एक साल में लिए गए सभी अंतिम निर्णय पूर्ण आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए हैं। आयोग ने यह भी कहा कि केवल कुछ आंतरिक टिप्पणियों को सामने रखकर पूरी प्रक्रिया का आकलन करना तस्वीर का एक हिस्सा देखने के समान है।
आयोग ने अपने बयान में कहा कि तीनों चुनाव आयुक्तों के अलावा आयोग के अधिकारी भी चुनावी व्यवस्था में सुधार के लिए सुझाव देने के लिए अधिकृत हैं।
तेजस्वी यादव ने उठाए सवाल
बिहार में विपक्ष की ओर से इस मुद्दे पर सबसे मुखर प्रतिक्रिया RJD नेता तेजस्वी यादव की सामने आई है।
उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए और बिहार तथा पश्चिम बंगाल में दोबारा चुनाव कराने की मांग की। यह उनकी राजनीतिक मांग है और चुनाव आयोग ने उनके आरोपों को स्वीकार नहीं किया है।
तेजस्वी ने चुनाव से जुड़े रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की अवधि में बदलाव को लेकर भी सवाल उठाया। उनके अनुसार ऐसे बदलाव चुनाव परिणामों को चुनौती देने के लिए उपलब्ध दस्तावेजी साक्ष्यों पर असर डाल सकते हैं। यह भी उनका राजनीतिक आरोप है।
कांग्रेस ने पटना में किया प्रदर्शन
बिहार कांग्रेस ने भी बुधवार को पटना में प्रदर्शन किया। पार्टी नेताओं ने SIR और चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar के इस्तीफे की मांग की।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि अन्य चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को नजरअंदाज किया गया। ये कांग्रेस नेताओं के आरोप हैं; चुनाव आयोग ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
BJP ने आयोग का बचाव किया
दूसरी ओर BJP ने चुनाव आयोग का बचाव किया है। पार्टी की ओर से कहा गया कि आयोग के सदस्यों के बीच आंतरिक deliberation के दौरान अलग-अलग विचार सामने आना लोकतांत्रिक संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है।
इस तरह एक ही घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक दलों की व्याख्या अलग-अलग है।
SIR का मुद्दा इतना महत्वपूर्ण क्यों है
SIR सीधे मतदाता सूची से जुड़ा हुआ है। मतदाता सूची में किसी व्यक्ति का नाम शामिल होना, हटना या उसमें सुधार होना उसके मतदान के अधिकार से संबंधित है।
इसी वजह से मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में पारदर्शिता, दस्तावेजों की जांच और नागरिकों को अपनी आपत्ति दर्ज कराने का अवसर महत्वपूर्ण होता है।
बिहार में SIR को लेकर पहले से ही राजनीतिक बहस चल रही थी। अब चुनाव आयोग के भीतर कथित आपत्तियों से जुड़ी रिपोर्ट आने के बाद यह बहस एक नए स्तर पर पहुंच गई है।
आयोग के सामने अब सबसे महत्वपूर्ण चुनौती
इस विवाद के बीच चुनाव आयोग के सामने सबसे महत्वपूर्ण विषय मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया में जनता का भरोसा बनाए रखना है।
आयोग का कहना है कि उसके अंतिम फैसले सर्वसम्मत रहे हैं। दूसरी ओर विपक्षी दल आंतरिक टिप्पणियों और कथित आपत्तियों को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
आगे की बहस में आधिकारिक दस्तावेज, चुनाव आयोग के आदेश और न्यायिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
बिहार में MLC चुनाव भी सामने
इस राजनीतिक विवाद के बीच बिहार में विधान परिषद की आठ सीटों के चुनाव की प्रक्रिया भी शुरू होने वाली है। चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में 23 अक्टूबर को मतदान होगा। नामांकन 29 सितंबर से शुरू होगा और 27 अक्टूबर को मतगणना होगी।
इसलिए आने वाले दिनों में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे बिहार की राजनीति में लगातार चर्चा का विषय बने रह सकते हैं।
अब नजर दस्तावेज और अगले कदम पर
SIR विवाद में इस समय तीन अलग-अलग बातें सामने हैं। पहली, चुनाव आयोग के भीतर कुछ मामलों पर सवाल या टिप्पणियों की रिपोर्ट। दूसरी, आयोग का आधिकारिक पक्ष कि अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए। और तीसरी, विपक्षी दलों की राजनीतिक आपत्तियां और उनकी मांगें।
इन तीनों को अलग-अलग समझना जरूरी है ताकि राजनीतिक आरोप और प्रमाणित संस्थागत तथ्य एक-दूसरे में न मिलें।
आने वाले दिनों में यदि चुनाव आयोग की ओर से कोई नया दस्तावेज, स्पष्टीकरण या न्यायिक कार्रवाई सामने आती है, तो विवाद की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
Seemanchal Live इस मामले से जुड़े आधिकारिक फैसलों और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं पर नजर बनाए रखेगा।
आपके अनुसार मतदाता सूची के पुनरीक्षण में सबसे जरूरी चीज क्या होनी चाहिए: पारदर्शिता, दस्तावेजों की आसान जांच या शिकायतों का तेज समाधान? अपनी राय Seemanchal Live के साथ साझा करें।












