पटना में प्रदर्शन के दौरान बैरिकेडिंग टूटी, वाटर कैनन चला और 25 प्रदर्शनकारी हिरासत में लिए गए; दो पुलिसकर्मी घायल, छात्र प्रतिनिधियों ने मुख्य सचिव से की मुलाकात—TRE-4 का पैटर्न और भर्ती व्यवस्था बना सबसे बड़ा मुद्दा
पटना, 26 अगस्त 2026: बिहार में सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले युवाओं का असंतोष एक बार फिर सड़कों पर दिखाई दिया है। मंगलवार को पटना में अलग-अलग भर्ती परीक्षाओं से जुड़े अभ्यर्थियों और छात्र संगठनों ने बड़ा प्रदर्शन किया। आंदोलन का केंद्र केवल एक परीक्षा नहीं है—TRE-4 का नया परीक्षा पैटर्न, 70वीं BPSC परीक्षा को लेकर आरोप, BSSC की लंबित भर्तियां, domicile की मांग और recruitment system में transparency जैसे कई मुद्दे इसमें जुड़ गए हैं।
मंगलवार के प्रदर्शन के दौरान हालात उस समय तनावपूर्ण हो गए जब प्रदर्शनकारी आगे बढ़ने लगे और पुलिस की barricading से उनका टकराव हुआ। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए water cannon का इस्तेमाल किया। Indian Express के मुताबिक दो पुलिसकर्मी घायल हुए और 25 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। बाद में छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल ने बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत से मुलाकात कर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा।
यह घटना अब केवल “छात्र बनाम पुलिस” की कहानी नहीं रह गई है। असली सवाल यह है कि बिहार में सरकारी भर्ती की तैयारी कर रहे हजारों युवाओं के बीच बार-बार असंतोष क्यों पैदा हो रहा है।
TRE-4 पर क्या है सबसे बड़ा विवाद?
मौजूदा आंदोलन का प्रमुख मुद्दा Teacher Recruitment Examination-4 यानी TRE-4 है।
BPSC ने 18 अगस्त को TRE-4 के जरिए 32,388 शिक्षक पदों पर भर्ती की प्रक्रिया की जानकारी दी थी। आवेदन 1 सितंबर से 30 सितंबर तक लिए जाने हैं और परीक्षा दिसंबर 2026 या जनवरी 2027 में संभावित है।
लेकिन विवाद examination pattern को लेकर है।
आयोग ने TRE-4 को परिस्थितियों के अनुसार दो चरणों में आयोजित करने और objective examinations में negative marking जारी रखने की बात कही है। दूसरी तरफ प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी single-stage examination की मांग कर रहे हैं। वे negative marking हटाने की भी मांग कर रहे हैं।
यहीं से आयोग और अभ्यर्थियों के बीच मतभेद गहरा गया।
छात्रों को Normalisation की भी चिंता
अभ्यर्थियों की चिंता केवल दो चरणों तक सीमित नहीं है।
अगर किसी बड़ी परीक्षा को कई shifts में आयोजित किया जाता है तो अलग-अलग प्रश्नपत्रों की difficulty को balance करने के लिए normalisation जैसी व्यवस्था की जरूरत पड़ सकती है।
छात्रों का एक वर्ग इस प्रक्रिया को लेकर आशंकित है और चाहता है कि परीक्षा का स्वरूप ऐसा हो जिसमें score comparison को लेकर विवाद की गुंजाइश कम रहे।
BPSC के मुताबिक अगर applications पांच लाख से कम रहते हैं तो परीक्षा तीन shifts में और संख्या पांच लाख से अधिक होने पर छह shifts में कराई जा सकती है।
यही वजह है कि परीक्षा शुरू होने से पहले ही pattern बड़ा मुद्दा बन गया है।
70वीं BPSC का विवाद भी आंदोलन में शामिल
TRE-4 अकेला मुद्दा नहीं है।
प्रदर्शन में शामिल कई अभ्यर्थी 70वीं BPSC परीक्षा को रद्द करने की मांग भी कर रहे हैं। उनका आरोप है कि परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताएं हुईं और paper leak से जुड़े सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
हालांकि BPSC ने इन आरोपों को खारिज किया है। आयोग ने social media पर circulating कुछ सामग्री को fake बताते हुए अपने evaluation process का बचाव किया है।
इसलिए यहां दोनों पक्षों के दावों को अलग-अलग समझना जरूरी है—अभ्यर्थी जांच और cancellation की मांग कर रहे हैं, जबकि आयोग परीक्षा की integrity पर लगाए गए आरोपों को स्वीकार नहीं करता।
100% Domicile की मांग
आंदोलन में एक और महत्वपूर्ण मांग बिहार के सरकारी रोजगार में 100 प्रतिशत domicile-based recruitment की है।
छात्रों का एक वर्ग चाहता है कि राज्य की नौकरियों, खासकर शिक्षक भर्ती में बिहार के निवासियों को पूर्ण प्राथमिकता दी जाए।
BPSC का कहना है कि domicile policy तय करना आयोग का नहीं बल्कि राज्य सरकार का विषय है। आयोग के अनुसार उसकी परीक्षाओं में शामिल होने वाले लगभग 72 प्रतिशत candidates बिहार के होते हैं।
इसलिए domicile का फैसला examination commission के स्तर पर नहीं बल्कि राजनीतिक और नीतिगत स्तर पर होना है।
एक टिप्पणी ने आंदोलन को और भड़काया
पहले से चल रहे आंदोलन के बीच BPSC के Examination Controller राजेश कुमार सिंह की एक टिप्पणी ने विवाद को और बढ़ा दिया।
उन्होंने press interaction के दौरान एक हिंदी कहावत का इस्तेमाल किया, जिसे प्रदर्शनकारी छात्रों से जोड़कर देखा गया। बाद में उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति या समूह की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था और टिप्पणी से किसी को दुख पहुंचा हो तो उन्होंने खेद जताया।
मामला बढ़ने के बाद बिहार सरकार ने Examination Controller को निलंबित करने का आदेश दिया।
लेकिन अधिकारी पर कार्रवाई होने के बावजूद recruitment से जुड़े मूल मुद्दे खत्म नहीं हुए।
गांधी मैदान से शुरू हुआ मार्च
मंगलवार का प्रदर्शन गांधी मैदान से शुरू हुआ।
अलग-अलग student organisations और competitive-exam aspirants इसमें शामिल हुए। प्रदर्शनकारी आगे बढ़ते हुए Dak Bungalow इलाके तक पहुंचे, जहां पुलिस ने barricades लगाई थीं।
इसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बनी।
Hindustan Times के अनुसार प्रदर्शन के कारण पटना के कई महत्वपूर्ण रास्तों पर घंटों traffic प्रभावित रहा और Bailey Road समेत आसपास के routes पर लंबा जाम लगा।
इस दौरान पुलिस ने water cannon का इस्तेमाल किया।
मुख्य सचिव तक पहुंची छात्रों की मांग
सड़क पर टकराव के बाद बातचीत का रास्ता भी खुला।
प्रदर्शनकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत से मिला और विभिन्न सरकारी पदों की लंबित परीक्षाएं जल्द कराने तथा TRE-4 को single-phase format में आयोजित करने समेत अपनी मांगों का memorandum सौंपा।
यह बैठक महत्वपूर्ण है क्योंकि आंदोलन अब केवल BPSC headquarters या protest site तक सीमित नहीं रहा; मामला राज्य सरकार के शीर्ष administrative level तक पहुंच चुका है।
BSSC और दूसरी भर्तियों को लेकर भी नाराजगी
इस आंदोलन को समझने के लिए केवल TRE-4 देखना पर्याप्त नहीं होगा।
प्रदर्शनकारी BSSC की recruitment processes और दूसरे सरकारी पदों को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं।
एक प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया कि कुछ recruitment drives लंबे समय से लंबित हैं और exam dates घोषित करने में लगातार देरी हो रही है।
यानी युवाओं की शिकायत केवल यह नहीं है कि किसी एक परीक्षा का pattern गलत है।
उनकी बड़ी चिंता predictability की है—vacancy कब आएगी, परीक्षा कब होगी, result कब आएगा और appointment कब मिलेगा?
बिहार के युवाओं के लिए समय भी एक संसाधन है
सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले candidate के लिए एक साल की देरी सामान्य administrative delay नहीं होती।
उसकी उम्र बढ़ती है, आर्थिक दबाव बढ़ता है और preparation पर परिवार का खर्च जारी रहता है।
कई अभ्यर्थी वर्षों तक coaching, किराया, books और examination fees पर पैसा खर्च करते हैं।
इसलिए recruitment calendar में लगातार uncertainty युवाओं के लिए केवल academic problem नहीं बल्कि आर्थिक और सामाजिक समस्या भी बन जाती है।
यही कारण है कि छोटी दिखाई देने वाली procedural changes भी कई बार बड़े आंदोलन का रूप ले लेती हैं।
सरकार ने शुरू किया Student Support System
इस बीच बिहार सरकार ने विद्यार्थियों की शिकायतों के लिए ‘विद्यार्थी सहयोग शिविर’ की व्यवस्था शुरू करने की घोषणा की है।
इसके तहत हर महीने के चौथे मंगलवार को educational institutions में camps लगाए जाने हैं। साथ ही विद्यार्थी सहयोग Portal और 1100 helpline के माध्यम से शिकायत दर्ज करने और उसका status track करने की व्यवस्था की बात कही गई है।
यह व्यवस्था सामान्य educational grievances के लिए उपयोगी हो सकती है।
लेकिन competitive recruitment examinations से जुड़े बड़े policy disputes का समाधान केवल grievance portal से संभव नहीं होगा। इसके लिए आयोग, सरकार और अभ्यर्थियों के बीच स्पष्ट संवाद जरूरी होगा।
अब समाधान कहां है?
बिहार में सरकारी भर्ती को लेकर बार-बार होने वाले आंदोलनों का स्थायी समाधान केवल पुलिस व्यवस्था से नहीं निकल सकता।
इसके लिए तीन चीजें महत्वपूर्ण होंगी—स्पष्ट annual recruitment calendar, परीक्षा नियमों की पहले से पूरी जानकारी और selection process में ऐसी transparency जिस पर candidates भरोसा कर सकें।
उसी तरह candidates की मांगों पर भी सरकार और आयोग को यह स्पष्ट करना होगा कि कौन-सी मांग स्वीकार की जा सकती है और कौन-सी कानूनी या administrative कारणों से संभव नहीं है।
मंगलवार को सड़क पर जो हुआ वह इस लंबे विवाद का केवल एक दृश्य था।
असली कहानी उन हजारों युवाओं की है जो वर्षों की तैयारी के बाद चाहते हैं कि भर्ती परीक्षा समय पर हो, नियम स्पष्ट हों और परिणाम पर भरोसा किया जा सके।
26 अगस्त को स्थिति यही है कि प्रदर्शन के बाद छात्र प्रतिनिधियों की बात मुख्य सचिव तक पहुंच चुकी है, विवादित टिप्पणी पर अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई भी हो चुकी है, लेकिन TRE-4 के examination pattern और recruitment reforms को लेकर मूल मतभेद अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं
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Bihar
बिहार में भर्ती परीक्षाओं पर फिर उबाल: TRE-4 से BPSC 70वीं तक सड़कों पर युवा, सरकार से बातचीत के बाद भी क्यों नहीं थम रहा आंदोलन?
पटना में प्रदर्शन के दौरान बैरिकेडिंग टूटी, वाटर कैनन चला और 25 प्रदर्शनकारी हिरासत में लिए गए; दो पुलिसकर्मी घायल, छात्र प्रतिनिधियों ने मुख्य सचिव से की…

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