जमुई। बिहार के जमुई में नाबालिग छात्रा और उसके साथी के साथ कथित बदसलूकी के वायरल वीडियो मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस के अनुसार मामले का मुख्य आरोपी नंदन यादव गिरफ्तारी के दौरान हुई मुठभेड़ में पैर में गोली लगने से घायल हो गया। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर अस्पताल में भर्ती कराया।
मामले में अब तक पांच आरोपियों को पकड़े जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस ने बताया है कि घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच जारी है। इस मामले में POCSO एक्ट और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस के अनुसार कैसे हुई मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी
पुलिस के मुताबिक नंदन यादव की तलाश में टीम मंगलवार तड़के जमुई के प्रतापपुर गांव के पास नदी किनारे और पहाड़ी क्षेत्र में पहुंची थी। पुलिस का दावा है कि टीम को देखकर आरोपियों ने भागने की कोशिश की और पुलिस टीम पर हमला किया।
इसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की, जिसमें नंदन यादव के पैर में गोली लगी। घायल अवस्था में उसे गिरफ्तार कर सरकारी अस्पताल ले जाया गया। पुलिस ने इस कार्रवाई को गिरफ्तारी अभियान के दौरान हुई मुठभेड़ बताया है।
हरेराम यादव भी गिरफ्तार
मुख्य आरोपी नंदन यादव के साथ हरेराम यादव को भी गिरफ्तार किए जाने की जानकारी पुलिस ने दी है। दोनों की भूमिका वायरल वीडियो और घटना से जुड़े अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांची जा रही है।
पुलिस का कहना है कि घटना में शामिल अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आने के बाद उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
अब तक पांच आरोपी पुलिस की गिरफ्त में
जमुई पुलिस के अनुसार मामले में तीन नाबालिगों को पहले हिरासत में लेकर पूछताछ की गई थी। इसके बाद नंदन यादव और हरेराम यादव को गिरफ्तार किया गया।
इस तरह मामले में अब तक पांच लोगों को पकड़े जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि सभी आरोपियों की भूमिका एक जैसी है या नहीं, यह जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।
वायरल वीडियो से सामने आया था मामला
यह मामला 19 सितंबर की घटना से जुड़ा है। नाबालिग छात्र-छात्रा के साथ कथित अभद्र व्यवहार का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला सामने आया।
वीडियो में नाबालिगों के साथ कथित तौर पर बदसलूकी होती दिखाई देने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की। पुलिस ने वीडियो और दूसरे उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान करने का काम शुरू किया।
मामले में पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि नाबालिग पीड़ितों की पहचान सार्वजनिक करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
120 सोशल मीडिया प्रोफाइल पुलिस की नजर में
जमुई मामले में पुलिस की जांच अब सोशल मीडिया तक भी पहुंच गई है। पुलिस ने कथित तौर पर करीब 120 सोशल मीडिया प्रोफाइल और URLs की पहचान की है, जिन पर पीड़ित की पहचान उजागर करने वाली सामग्री प्रसारित होने की बात सामने आई है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि नाबालिग पीड़ितों से संबंधित वीडियो को शेयर या दोबारा प्रसारित न करें। इस मामले में साइबर पुलिस भी कार्रवाई कर रही है।
POCSO के तहत दर्ज है मामला
नाबालिग से जुड़े होने के कारण मामले में POCSO एक्ट के प्रावधान लगाए गए हैं। इसके साथ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत भी प्राथमिकी दर्ज की गई है।
पुलिस मुख्यालय ने मामले को गंभीरता से लिया है और जांच पूरी होने के बाद त्वरित न्यायिक प्रक्रिया के लिए आवश्यक कदम उठाने की बात कही है।
राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी मांगी रिपोर्ट
मामले पर राष्ट्रीय महिला आयोग पहले ही संज्ञान ले चुका है। आयोग ने बिहार के पुलिस महानिदेशक से कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और पीड़िता की सुरक्षा, कानूनी सहायता तथा मनोवैज्ञानिक सहयोग सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।
अब आगे क्या होगा
मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस के सामने अब मामले की पूरी कड़ी जोड़ने की चुनौती है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि घटना में कौन-कौन लोग शामिल थे, किसकी क्या भूमिका थी और वायरल वीडियो किसने बनाया तथा किस तरह सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ।
साथ ही पुलिस को यह सुनिश्चित करना होगा कि नाबालिग पीड़ितों की पहचान सार्वजनिक न हो और उनकी सुरक्षा तथा निजता बनी रहे।
न्यायिक प्रक्रिया में आरोपों की पुष्टि साक्ष्यों और अदालत के निर्णय के आधार पर होगी। फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
जमुई मामले में पुलिस की कार्रवाई के बाद अब नजर इस बात पर है कि बाकी संदिग्धों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है और जांच कितनी तेजी से पूरी होती है।
आपकी राय
जमुई जैसी घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस कार्रवाई के साथ सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था और साइबर निगरानी को किस तरह मजबूत किया जाना चाहिए? अपनी राय कमेंट में बताएं।












