कटिहार। सितंबर के अंतिम दिनों में मौसम का बदला मिजाज किसानों के लिए चिंता का कारण बनता जा रहा है। कटिहार जिले में अगले दो दिनों तक बारिश और गरज-चमक की संभावना बनी हुई है। मौसम पूर्वानुमान के अनुसार 25 सितंबर को भी बारिश की संभावना करीब 90 प्रतिशत है और इस दौरान लगभग 27 मिलीमीटर तक वर्षा हो सकती है।
लगातार बारिश का असर जिले के धान और दूसरी खरीफ फसलों पर पड़ने की आशंका है। जिन खेतों में पहले से पानी जमा है, वहां अतिरिक्त बारिश किसानों की परेशानी बढ़ा सकती है।
25 सितंबर को भी बारिश की संभावना
मौसम पूर्वानुमान के अनुसार शुक्रवार को भी कटिहार में बारिश का दौर जारी रह सकता है। इसके बाद 26 सितंबर को भी हल्की बारिश की संभावना बताई गई है।
27 और 28 सितंबर को बारिश की संभावना अपेक्षाकृत कम बताई गई है, लेकिन बादलों का असर बना रह सकता है।
सितंबर के आखिरी सप्ताह में लगातार बदलते मौसम के कारण किसानों को खेतों की स्थिति पर नजर रखने की जरूरत है।
धान की फसल को लेकर चिंता
कटिहार कृषि प्रधान जिला है और बड़ी संख्या में किसान धान की खेती पर निर्भर हैं। इस समय धान की फसल खेतों में खड़ी है। ऐसे समय में लगातार और तेज बारिश होने पर खेतों में जरूरत से ज्यादा पानी जमा होने की स्थिति बन सकती है।
जिन खेतों में जल निकासी की व्यवस्था कमजोर है, वहां लंबे समय तक पानी जमा रहने से फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है।
किसानों के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने की है।
बारिश किसानों के लिए राहत भी
हालांकि बारिश को पूरी तरह नुकसान के रूप में नहीं देखा जा सकता। धान समेत खरीफ फसलों के लिए पर्याप्त पानी जरूरी है और बारिश से कई इलाकों में किसानों को सिंचाई के खर्च से राहत मिल सकती है।
जिन खेतों में पानी की कमी थी, वहां बारिश से फसल को फायदा भी मिल सकता है। समस्या तब बढ़ती है जब कम समय में बहुत अधिक बारिश हो जाए और खेतों से पानी निकलने का रास्ता नहीं हो।
यही कारण है कि किसान इस समय बारिश की मात्रा और खेतों में पानी के स्तर दोनों पर नजर रख रहे हैं।
तापमान में भी बदलाव
बारिश के कारण कटिहार में तापमान में भी गिरावट देखने को मिल रही है। मौसम में ठंडक बढ़ने से लोगों को गर्मी और उमस से राहत मिली है।
लेकिन लगातार बारिश के कारण ग्रामीण सड़कों, खेतों और निचले इलाकों में जलजमाव की स्थिति भी बन सकती है।
किसानों को क्या करना चाहिए
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार किसानों को अपने खेतों में जल निकासी की स्थिति की जांच करनी चाहिए। यदि खेत में जरूरत से ज्यादा पानी जमा हो रहा है तो उपलब्ध प्राकृतिक या कृत्रिम निकासी मार्ग को साफ रखना जरूरी है।
तेज हवा और गरज-चमक के दौरान किसानों को खुले खेतों में काम करने से बचना चाहिए। आकाशीय बिजली की स्थिति में सुरक्षित स्थान पर रहना जरूरी है।
खेतों में कीटनाशक या अन्य कृषि दवाओं का इस्तेमाल भी मौसम की स्थिति को देखकर ही करना चाहिए।
सीमांचल के दूसरे जिलों पर भी असर
कटिहार के साथ पूर्णिया, अररिया और किशनगंज में भी बारिश का दौर जारी है। पूर्णिया में पिछले 24 घंटे में 48 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई और 25 तथा 26 सितंबर को भारी बारिश के साथ गरज-चमक और आकाशीय बिजली की संभावना बताई गई है।
इससे साफ है कि उत्तर-पूर्व बिहार में मौसम फिलहाल पूरी तरह सामान्य नहीं हुआ है।
अब किसानों की नजर मौसम पर
धान की फसल के लिए अगले कुछ दिन महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। अगर बारिश सामान्य रही तो इससे खरीफ फसलों को फायदा हो सकता है, लेकिन तेज और लगातार बारिश होने पर जलजमाव किसानों की परेशानी बढ़ा सकता है।
कटिहार के किसानों के लिए फिलहाल खेतों में पानी की स्थिति पर नजर रखना और मौसम विभाग के अपडेट पर ध्यान देना जरूरी है।
क्या आपके गांव में बारिश से धान की फसल को फायदा हुआ है या खेतों में पानी जमा होने से नुकसान का खतरा बढ़ गया है? अपनी जानकारी Seemanchal Live के साथ साझा करें।












